मुनीर नियाज़ी की मुन्तख़ब 10 नज़्में

पाकिस्तान के आग्रणी आधुनिक शायरों में विख्यात/फि़ल्मों के लिए गीत भी लिखे

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छै रंगीं दरवाज़े

छै रंगों के फूल खिले हैं

मुनीर नियाज़ी

डराए गए शहरों के बातिन

इन दिनों ये हालत है मेरी ख़्वाब-ए-हस्ती में

मुनीर नियाज़ी

दुश्मनों के दरमियान शाम

फैलती है शाम देखो डूबता है दिन अजब

मुनीर नियाज़ी

हमेशा देर कर देता हूँ

हमेशा देर कर देता हूँ मैं हर काम करने में

मुनीर नियाज़ी

इन लोगों से ख़्वाबों में मिलना ही अच्छा रहता है

थोड़ी देर को साथ रहे किसी धुँदले शहर के नक़्शे पर

मुनीर नियाज़ी

जादूगर

जब मेरा जी चाहे मैं जादू के खेल दिखा सकता हूँ

मुनीर नियाज़ी

ख़्वाहिश के ख़्वाब

घर था या कोई और जगह जहाँ मैं ने रात गुज़ारी थी

मुनीर नियाज़ी

मैं और बादल

शाम का बादल नए नए अंदाज़ दिखाया करता है

मुनीर नियाज़ी

सदा ब-सहरा

चारों सम्त अंधेरा घुप है और घटा घनघोर

मुनीर नियाज़ी

वतन में वापसी

कल वो मिली जो बचपन में मेरे भाई से खेला करती थी

मुनीर नियाज़ी

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