मख़दूम मुहिउद्दीन की 10 मशहूर नज़्में

महत्वपूर्ण प्रगतिशील शायर। उनकी कुछ ग़ज़लें ' बाज़ार ' और ' गमन ' , जैसी फिल्मों से मशहूर

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इंतिज़ार

रात भर दीदा-ए-नमनाक में लहराते रहे

मख़दूम मुहिउद्दीन

चारा-गर

इक चमेली के मंडवे-तले

मख़दूम मुहिउद्दीन

चाँद तारों का बन

मोम की तरह जलते रहे हम शहीदों के तन

मख़दूम मुहिउद्दीन

आज की रात न जा

रात आई है बहुत रातों के ब'अद आई है

मख़दूम मुहिउद्दीन

इंक़लाब

ऐ जान-ए-नग़्मा जहाँ सोगवार कब से है

मख़दूम मुहिउद्दीन

'ग़ालिब'

तुम जो आ जाओ आज दिल्ली में

मख़दूम मुहिउद्दीन

हवेली

एक बोसीदा हवेली यानी फ़र्सूदा समाज

मख़दूम मुहिउद्दीन

अंधेरा

रात के हाथ में इक कासा-ए-दरयुज़ा-गरी

मख़दूम मुहिउद्दीन

चुप न रहो

शब की तारीकी में इक और सितारा टूटा

मख़दूम मुहिउद्दीन

टूटे हुए तारे

नवा-ए-दर्द मिरी कहकशाँ में डूब गई

मख़दूम मुहिउद्दीन