तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

असरार-उल-हक़ मजाज़

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    तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए

    इस सई-ए-करम को क्या कहिए बहला भी गए तड़पा भी गए

    हम अर्ज़-ए-वफ़ा भी कर सके कुछ कह सके कुछ सुन सके

    याँ हम ने ज़बाँ ही खोली थी वाँ आँख झुकी शरमा भी गए

    आशुफ़्तगी-ए-वहशत की क़सम हैरत की क़सम हसरत की क़सम

    अब आप कहें कुछ या कहें हम राज़-ए-तबस्सुम पा भी गए

    रूदाद-ए-ग़म-ए-उल्फ़त उन से हम क्या कहते क्यूँकर कहते

    इक हर्फ़ निकला होंटों से और आँख में आँसू भी गए

    अरबाब-ए-जुनूँ पर फ़ुर्क़त में अब क्या कहिए क्या क्या गुज़री

    आए थे सवाद-ए-उल्फ़त में कुछ खो भी गए कुछ पा भी गए

    ये रंग-ए-बहार-ए-आलम है क्यूँ फ़िक्र है तुझ को साक़ी

    महफ़िल तो तिरी सूनी हुई कुछ उठ भी गए कुछ भी गए

    इस महफ़िल-ए-कैफ़-ओ-मस्ती में इस अंजुमन-ए-इरफ़ानी में

    सब जाम-ब-कफ़ बैठे ही रहे हम पी भी गए छलका भी गए

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    जगजीत सिंह

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    नोमान शौक़

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    फ़हद हुसैन

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    नोमान शौक़

    तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए नोमान शौक़

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