Manzar Bhopali's Photo'

मंज़र भोपाली

1959 - | भोपाल, भारत

ग़ज़ल 14

शेर 18

जो पारसा हो तो क्यूँ इम्तिहाँ से डरते हो

हम ए'तिबार का मीज़ान ले के आए हैं

ये अश्क तेरे मिरे राएगाँ जाएँगे

उन्हीं चराग़ों से रौशन मोहब्बतें होंगी

इधर तो दर्द का प्याला छलकने वाला है

मगर वो कहते हैं ये दास्तान कुछ कम है

ई-पुस्तक 1

Ye Sadi Hamari Hai

 

1991

 

संबंधित शायर

  • मुनव्वर राना मुनव्वर राना समकालीन
  • अहमद हमदानी अहमद हमदानी समकालीन
  • राहत इंदौरी राहत इंदौरी समकालीन
  • सरशार सिद्दीक़ी सरशार सिद्दीक़ी समकालीन
  • बिस्मिल सईदी बिस्मिल सईदी समकालीन
  • अहमद मुश्ताक़ अहमद मुश्ताक़ समकालीन
  • सलाम मछली शहरी सलाम मछली शहरी समकालीन
  • क़तील शिफ़ाई क़तील शिफ़ाई समकालीन
  • ख़ुशबीर सिंह शाद ख़ुशबीर सिंह शाद समकालीन
  • ख़लील-उर-रहमान आज़मी ख़लील-उर-रहमान आज़मी समकालीन

"भोपाल" के और शायर

  • मुस्लिम सलीम मुस्लिम सलीम
  • दख़लन भोपाली दख़लन भोपाली
  • ग़ौसिया ख़ान सबीन ग़ौसिया ख़ान सबीन
  • अक़ील जामिद अक़ील जामिद
  • ज़िया फ़ारूक़ी ज़िया फ़ारूक़ी
  • नुसरत मेहदी नुसरत मेहदी
  • अंजुम रहबर अंजुम रहबर
  • डॉक्टर आज़म डॉक्टर आज़म
  • नूर मोहम्मद यास नूर मोहम्मद यास
  • अंजुम बाराबंकवी अंजुम बाराबंकवी

Added to your favorites

Removed from your favorites