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विश्वयुद्ध पर कहानियाँ

बुड्ढ़ा खूसट

सआदत हसन मंटो

"यह एक बूढ़े कर्नल के इश्क़ की सफ़लता की कहानी है। कर्नल उस्मानी एक बूढ़ा आदमी था जिसे सलीम जैसा जवान आदमी बूढ्ढा खूसट और अनावश्यक वस्तु समझता था लेकिन एक दिन उन्होंने देखा कि कर्नल उस्मानी उसकी महबूबा आयरन का चुम्बन ले रहे हैं तो सलीम को लगा कि वो ख़ुद कर्नल उस्मानी से ज़्यादा बूढ्ढा खूसट है।"

सुना है आलम-ए-बाला में कोई कीमिया-गर था

कुर्रतुलऐन हैदर

एक ऐसी शख्स की कहानी जो मोहब्बत तो करता है मगर उसका इज़हार करने की कभी हिम्मत नहीं कर पाता। पड़ोसी होने के बावजूद वह परिवार में एक फ़र्द की तरह रह रहा था और जहाँ-जहाँ वालिद साहब की पोस्टिंग होती रही मिलने आता रहा। ख़ानदान वाले सोचते रहे कि वह उनकी छोटी बेटी से मोहब्बत करता है। मगर वे तो उनकी बड़ी बेटी से मोहब्बत करता है। उसकी ख़्वाहिश थी कि काश, वह उसे एक बार ‘डार्लिंग’ कह सके।

क़ैदख़ाना

अहमद अली

एक ऐसे शख़्स की कहानी, जो तन्हा है और वक़्त गुज़ारी के लिए हर रोज शाम को शराब-ख़ाने में जाता है। वहाँ अपने रोज़ के साथियों से उसकी बातचीत होती है और फिर वह पेड़ों के झुरमुट के पीछे छुपे अपने मकान में आ जाता है। मकान उसे किसी क़ैदख़ाने की तरह लगता है। वह मकान से निकल पड़ता है और क़ब्रिस्तान, पहाड़ियों और दूसरी जगहों से गुज़रते, लोगों के मिलते और उनके साथ वक़्त गुज़ारते हुए वह इस नतीजे पर पहुँचता है कि यह ज़िंदगी ही एक क़ैदख़ाना है।

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