aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
नज्मआफ़न्दी, मिर्ज़ा तजम्मुल हुसैन (1893-1976) प्रतिष्ठित लोकप्रिय शाइर जो राष्ट्रीय भावना से प्रेरित थे। फ़रसी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी जानते थे। नौजवानी में ही खद्दर धारी हो गए जिस के कारण सरकारी नौकरी छोड़ दी। आगरा के, शाइरों के घराने में पैदा हुए। कई साल हैदराबाद रहे जहाँ से कराची चले गए और वहीं देहांत हुआ।
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here