शेर

विषयानुसार हज़ारों लोकप्रिय शेर


  • जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी
    उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो

    अल्लामा इक़बाल

  • जो आग लगाई थी तुम ने उस को तो बुझाया अश्कों ने
    जो अश्कों ने भड़काई है उस आग को ठंडा कौन करे

    मुईन अहसन जज़्बी

  • आदमी आदमी से मिलता है
    दिल मगर कम किसी से मिलता है

    जिगर मुरादाबादी

  • साक़ी गई बहार रही दिल में ये हवस
    तू मिन्नतों से जाम दे और मैं कहूँ कि बस

    मोहम्मद रफ़ी सौदा

  • कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी
    कुछ मुझे भी ख़राब होना था

    असरार-उल-हक़ मजाज़

  • शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ
    कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ

    वसीम बरेलवी

  • जब भी ग़ैरों की इनायत देखी
    हम को अपनों के सितम याद आए

    अज्ञात

  • मय-ख़ाने में क्यूँ याद-ए-ख़ुदा होती है अक्सर
    मस्जिद में तो ज़िक्र-ए-मय-ओ-मीना नहीं होता

    रियाज़ ख़ैराबादी

  • कितने मुफ़लिस हो गए कितने तवंगर हो गए
    ख़ाक में जब मिल गए दोनों बराबर हो गए

    शेख़ इब्राहीम ज़ौक़

  • ज़िंदगी दी हिसाब से उस ने
    और ग़म बे-हिसाब लिक्खा है

    एजाज़ अंसारी

  • इरादे बाँधता हूँ सोचता हूँ तोड़ देता हूँ
    कहीं ऐसा न हो जाए कहीं ऐसा न हो जाए

    हफ़ीज़ जालंधरी

  • तौहीद तो ये है कि ख़ुदा हश्र में कह दे
    ये बंदा ज़माने से ख़फ़ा मेरे लिए है

    मोहम्मद अली जौहर

  • ये तो नहीं कि तुम सा जहाँ में हसीं नहीं
    इस दिल को क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं

    दाग़ देहलवी

  • तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो
    तुम को देखें कि तुम से बात करें

    फ़िराक़ गोरखपुरी

  • वो बात सारे फ़साने में जिस का ज़िक्र न था
    वो बात उन को बहुत ना-गवार गुज़री है

    फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चित्रित शायरी

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