आज के चुनिन्दा 5 शेर

कमर बाँधे हुए चलने को याँ सब यार बैठे हैं

बहुत आगे गए बाक़ी जो हैं तय्यार बैठे हैं

इंशा अल्लाह ख़ान इंशा

आँखों से मोहब्बत के इशारे निकल आए

बरसात के मौसम में सितारे निकल आए

मंसूर उस्मानी

वो क्या ज़िंदगी जिस में जोशिश नहीं

वो क्या आरज़ू जिस में काविश नहीं

कृष्ण मोहन

एक इक बात में सच्चाई है उस की लेकिन

अपने वादों से मुकर जाने को जी चाहता है

कफ़ील आज़र अमरोहवी

जिन से इंसाँ को पहुँचती है हमेशा तकलीफ़

उन का दावा है कि वो अस्ल ख़ुदा वाले हैं

अब्दुल हमीद अदम
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आज का शब्द

सौत

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शब्दार्थ

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रग-ए-हर-साज़ ये कहती है कि नग़्मा-तराज़

मुझ को इक सल्तनत-ए-सौत-ओ-सदा चाहिए थी

शब्दकोश

Quiz A collection of interesting questions related to Urdu poetry, prose and literary history. Play Rekhta Quiz and check your knowledge about Urdu!

Which amongst the following is a prefix?
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क्या आप जानते हैं?

'ताज गीत' और 'इम्तियाज़ पच्चीसी' बच्चों की दो बहुत दिलचस्प किताबें हैं जो इम्तियाज़ अली ताज के लिए उनके बचपन में उनकी मां मुहम्मदी बेगम (1878-1908) ने लिखी थीं। वह अफ़साना निगार थीं और उर्दू की पहली नारी पत्रिका 'तहज़ीब ए निसवां' की संपादिका थीं जो उन्होंने अपने शौहर सैयद मुमताज़ अली के सहयोग से लाहौर से जारी किया था। उन्होंने इम्तियाज़ के लिए छोटी छोटी पच्चीस कहानियां लिखी थीं जो उनको ख़ुद सुनाती थीं।उन कहानियों को तस्वीरों से सजा कर सन् 1904 में 'इम्तियाज़ पच्चीसी'  के नाम से प्रकाशित किया गया था,उस समय इम्तियाज़ चार साल के थे। यह किताब बहुत लोकप्रिय हुई थी। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे के लिए कुछ दिलचस्प नज़्में खुद अपने हाथ से लिख कर एक हस्त लिखित किताब 'ताज गीत' के रूप में सुरक्षित कर लिया। इम्तियाज़ घर में ताज कहलाते थे। नज़्मों की यह किताब बाद में प्रकाशित की गई। इम्तियाज़ ने अपनी मां के स्वर्गवास के बाद 'तहज़ीब ए निसवां' का संपादन संभाला था। उन्होंने ड्रामा अनार कली लिख कर बहुत शोहरत पाई जिस पर बाद में फ़िल्म 'मुग़ल ए आज़म' बनी थी। उनकी बेगम हिजाब इम्तियाज़ अली भी एक सिद्धस्त कहानीकार थीं।

आर्काइव

आज की प्रस्तुति

स्वतंत्रता सेनानी और संविधान सभा के सदस्य। ' इंक़िलाब ज़िन्दाबाद ' का नारा दिया। कृष्ण भक्त , अपनी ग़ज़ल ' चुपके चुपके, रात दिन आँसू बहाना याद है ' के लिए प्रसिद्ध

चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है

हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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