आज के चुनिन्दा 5 शेर

कुछ तो पढ़िए कि लोग कहते हैं

आज 'ग़ालिब' ग़ज़ल-सरा हुआ

do render a recitation, people start to say

why is Ghalib silent pray why does he not orate

do render a recitation, people start to say

why is Ghalib silent pray why does he not orate

मिर्ज़ा ग़ालिब

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

जाने जाने गुल ही जाने बाग़ तो सारा जाने है

मीर तक़ी मीर

मक़ाम 'फ़ैज़' कोई राह में जचा ही नहीं

जो कू-ए-यार से निकले तो सू-ए-दार चले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

'जलील' आने लगी हैं हिचकियाँ क्यूँ

कहीं मैं याद फ़रमाया गया हूँ

जलील मानिकपूरी
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जिन जिन को था ये इश्क़ का आज़ार मर गए

अक्सर हमारे साथ के बीमार मर गए

मीर तक़ी मीर
आज का शब्द

गेसू

  • gesuu
  • گیسو

शब्दार्थ

Tresses/ ringlet

ये उड़ी उड़ी सी रंगत ये खुले खुले से गेसू

तिरी सुब्ह कह रही है तिरी रात का फ़साना

शब्दकोश

Quiz A collection of interesting questions related to Urdu poetry, prose and literary history. Play Rekhta Quiz and check your knowledge about Urdu!

Among the following choose the singular of the word 'Mulkon'
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क्या आप जानते हैं?

तखल्लुस

फ़िल्म शोले के 'सूरमा भोपाली' को तो सब जानते हैं। उनकेे हम वतन ग़फ़ूर मियां भी उन जैसा ही एक हास्य पात्र है जो हास्यकार तख़ल्लुस भोपाली(अब्दुल अहद ख़ां) ने 1960 में अपनी पत्रिका "भोपाल पंच"में सृजित किया था और उनके साथ हैं 'पानदान वाली ख़ाला' जो उन से भी ज़्यादा मशहूर हुईं। उन पर तो बाद में पूरी किताब प्रकाशित हुई।
ग़फ़ूर मियां एक पठान हैं, भोपाल से इश्क़ है, ख़ुद को अक़्लमंद समझते हैं मगर क़दम क़दम पर हिमाक़तें करते हैं। अपने बाप-दादा के बारे में ठेठ भोपाली उर्दू में शेख़ियां बघारते हैं। पानदान वाली ख़ाला पान चबाती, घर घर घूमने वाली जहां दीदा, अनुभवी बातूनी औरत हैं जो भोपाल की औरतों की शुद्ध भाषा और मुहावरों में पूराने दिनों और वर्तमान स्थिति की तुलना करती रहती हैं, देश की राजनीति पर आलोचना और व्यंग्य भी करती हैं। उनकी बातों पर औरतें ख़ूब ठठ्ठे लगाती हैं। 'भोपाल पंच' मुश्किल से तीन साल जारी रहा लेकिन अतीत और वर्तमान के लाग-डांट से सुसज्जित यह दोनों हास्य पात्र जीवित हैं, अपने युग के सामाजिक और राजनीतिक स्थितियों के चित्रकार हैं और अदब में तख़ल्लुस भोपाली की पहचान बन गए हैं।

आर्काइव

स्मृति

पुण्य तिथि

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

हस्ती अपनी हबाब की सी है

ये नुमाइश सराब की सी है

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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मीर तक़ी मीर

Jaan Hai To Jahaan Hai Pyaare! Meer Taqi Meer | Rekhta Studio

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