आज के चुनिन्दा 5 शेर

'मुसहफ़ी' हम तो ये समझे थे कि होगा कोई ज़ख़्म

तेरे दिल में तो बहुत काम रफ़ू का निकला

मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

सदा ऐश दौराँ दिखाता नहीं

गया वक़्त फिर हाथ आता नहीं

मीर हसन
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काम अब कोई आएगा बस इक दिल के सिवा

रास्ते बंद हैं सब कूचा-ए-क़ातिल के सिवा

अली सरदार जाफ़री

मैं तो मस्जिद से चला था किसी काबा की तरफ़

दुख तो ये है कि इबादत मिरी बद-नाम हुई

अहमद राही
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बैठ जाता हूँ जहाँ छाँव घनी होती है

हाए क्या चीज़ ग़रीब-उल-वतनी होती है

हफ़ीज़ जौनपुरी
आज का शब्द

ज़ंजीर

  • zanjiir
  • زنجیر

शब्दार्थ

chain

कोई पाबंद-ए-मोहब्बत ही बता सकता है

एक दीवाने का ज़ंजीर से रिश्ता क्या है

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

सबसे लोकप्रिय शायरों में शामिल/प्रमुख फि़ल्म गीतकार/अपनी गज़ल ‘गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते है’ के लिए प्रसिद्ध

ये मो'जिज़ा भी मोहब्बत कभी दिखाए मुझे

कि संग तुझ पे गिरे और ज़ख़्म आए मुझे

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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जावेद अख़्तर

Mushaira Jashn-e-Rekhta 4th Edition 2017

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