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अज़हर इक़बाल

Mere Munh Mein Khaak: Jashn-e-Rekhta 2017

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आज के टॉप 5

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

मुस्तफ़ा ज़ैदी

मोहब्बत के लिए कुछ ख़ास दिल मख़्सूस होते हैं

ये वो नग़्मा है जो हर साज़ पर गाया नहीं जाता

मख़मूर देहलवी

इतनी पी जाए कि मिट जाए मैं और तू की तमीज़

यानी ये होश की दीवार गिरा दी जाए

the formality of you and I should in wine be drowned

meaning that these barriers of sobriety be downed

the formality of you and I should in wine be drowned

meaning that these barriers of sobriety be downed

फ़रहत शहज़ाद

ज़ेहन में याद के घर टूटने लगते हैं 'शहाब'

लोग हो जाते हैं जी जी के पुराने कितने

मुस्तफ़ा शहाब
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ

दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

परवीन शाकिर
आर्काइव
आज का शब्द

जमाल

  • jamaal
  • جمال

शब्दार्थ

Elegance/ beauty

रौशन जमाल-ए-यार से है अंजुमन तमाम

दहका हुआ है आतिश-ए-गुल से चमन तमाम

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आर्काइव

आज की प्रस्तुति

अपनी ग़ज़ल 'गो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए' के लिए विख्यात, जिसे कई गायकों ने गाया है।

गो ज़रा सी बात पर बरसों के याराने गए

लेकिन इतना तो हुआ कुछ लोग पहचाने गए

पूर्ण ग़ज़ल देखें

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