आज के चुनिन्दा 5 शेर

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

मुस्तफ़ा ज़ैदी

शदीद प्यास थी फिर भी छुआ पानी को

मैं देखता रहा दरिया तिरी रवानी को

शहरयार

गुरेज़-पा है नया रास्ता किधर जाएँ

चलो कि लौट के हम अपने अपने घर जाएँ

जमाल ओवैसी

मैं रोज़ इधर से गुज़रता हूँ कौन देखता है

मैं जब इधर से गुज़रूँगा कौन देखेगा

मजीद अमजद
  • शेयर कीजिए

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ दवा ने काम किया

देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया

Stratagems all came apart, no cure could render remedy

it was this ailment of my heart, that finished me off finally

Stratagems all came apart, no cure could render remedy

it was this ailment of my heart, that finished me off finally

मीर तक़ी मीर
आज का शब्द

कहकशाँ

  • kahkashaa.n
  • کہکشاں

शब्दार्थ

Galaxy

इन्हीं पत्थरों पे चल कर अगर सको तो आओ

मिरे घर के रास्ते में कोई कहकशाँ नहीं है

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

अग्रणी प्रगतिशील शायरों में शामिल। मशहूर फ़िल्म गीतकार

ऐ शरीफ़ इंसानो

ख़ून अपना हो या पराया हो

पूर्ण नज़्म देखें
पसंदीदा विडियो
This video is playing from YouTube

क़ाज़ी अफ़ज़ाल हुसैन

Indian languages in the global market | Jashn-e-Rekhta 2017

इस विडियो को शेयर कीजिए

ई-पुस्तकें

Fiction Ki Talash Mein

अबु बक्र अब्बाद 

2014 फ़िक्शन

ख़ुमार-ए-गन्दुम

इब्न-ए-इंशा 

2005 हास्य-व्यंग

दीवान-ए-मुबतला

नूरुल हसन हाशमी 

1996 दीवान

Shumara Number-001

ख़्वाजा हसन सानी निज़ामी 

1987 Munadi

Bahgwat Geeta

मुनव्वर लखनवी 

1961

अन्य ई-पुस्तकें

नया क्या है

हम से जुड़िये

न्यूज़लेटर

* रेख़्ता आपके ई-मेल का प्रयोग नियमित अपडेट के अलावा किसी और उद्देश्य के लिए नहीं करेगा

Added to your favorites

Removed from your favorites