आज के चुनिन्दा 5 शेर

दिल की बिसात क्या थी निगाह-ए-जमाल में

इक आईना था टूट गया देख-भाल में

सीमाब अकबराबादी

अपनी अना की आज भी तस्कीन हम ने की

जी भर के उस के हुस्न की तौहीन हम ने की

इक़बाल साजिद

हज़ारों काम मोहब्बत में हैं मज़े के 'दाग़'

जो लोग कुछ नहीं करते कमाल करते हैं

दाग़ देहलवी
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हुस्न के समझने को उम्र चाहिए जानाँ

दो घड़ी की चाहत में लड़कियाँ नहीं खुलतीं

परवीन शाकिर

ग़ज़ालाँ तुम तो वाक़िफ़ हो कहो मजनूँ के मरने की

दिवाना मर गया आख़िर को वीराने पे क्या गुज़री

राम नरायण मौज़ूँ
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आज का शब्द

जौर

  • jaur
  • جور

शब्दार्थ

tyranny/ oppression

आप पछताएँ नहीं जौर से तौबा करें

आप के सर की क़सम 'दाग़' का हाल अच्छा है

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

अग्रणी प्रगतिशील शायरों में शामिल/आलोचक, बुद्धिजीवी और साहित्यिक पत्रिका ‘गुफ़्तुगू’ के संपादक/भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित/उर्दू शायरों पर टीवी सीरियलों के निर्माता

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जावेद अख़्तर

Jan Nisar Akhtar & Kaifi Azmi : Do Shayar, Do Zindagiyan, Ek Kahani | 5th Jashn-e-Rekhta 2018

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