आज के चुनिन्दा 5 शेर

कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं

नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है

बेदम शाह वारसी
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ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है

इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है

इबरत सिद्दीक़ी
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मिरे हर अमल को सराह कर ये अज़िय्यतें दिया करो

मिरी जान तुम भी अजीब हो तुम्हें रूठना भी तो चाहिए

अाग़ा सरोश
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क़रार दिल को सदा जिस के नाम से आया

वो आया भी तो किसी और काम से आया

जमाल एहसानी

जब जाती है दुनिया घूम फिर कर अपने मरकज़ पर

तो वापस लौट कर गुज़रे ज़माने क्यूँ नहीं आते

इबरत मछलीशहरी
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आज का शब्द

गिर्दाब

  • girdaab
  • گرداب

शब्दार्थ

vortex

मौजों की सियासत से मायूस हो 'फ़ानी'

गिर्दाब की हर तह में साहिल नज़र आता है

शब्दकोश
आर्काइव

आज की प्रस्तुति

शहरयार

शहरयार

1936-2012

अग्रणी आधुनिक उर्दू शायरों में शामिल। फ़िल्म गीतकार , ' फ़िल्म उमराव जान ' , के गीतों के लिए प्रसिद्ध। भारतीय ज्ञान पीठ एवार्ड से सम्मानित

ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है

हद-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है

पूर्ण ग़ज़ल देखें
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क़ाज़ी अबदुस्सत्तार

Urdu Afsane Ki Zinda Haqiqat | Qazi Abdus Sattar and Syed Mohammad Ashraf | Jashn-e-Rekhta

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