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लेखक: परिचय

पहचान: विशिष्ट उर्दू आलोचक, इक़बालियात के विशेषज्ञ, शिक्षक और पूर्वी (मशरिक़ी) विचारों के प्रतिनिधि विचारक।

प्रोफ़ेसर अब्दुल मुग़नी (पूरा नाम: अबुल मुबर्रद सैयद अब्दुल मुग़नी) का जन्म 4 जनवरी 1936 को भारत के बिहार राज्य के औरंगाबाद ज़िले के एक विद्वान सादात परिवार में हुआ था। उनके पिता क़ाज़ी अब्दुल रऊफ़ नदवी एक प्रतिष्ठित धार्मिक विद्वान थे। उन्होंने पारंपरिक इस्लामी शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक अंग्रेज़ी शिक्षा में भी विशेषज्ञता हासिल की। उन्होंने मदरसा शम्स-उल-हुदा से 'फ़ाज़िल' किया और बाद में अंग्रेज़ी में एम.ए. और पी.एच.डी. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। वे पटना कॉलेज में अंग्रेज़ी के प्रोफ़ेसर रहे और अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू, बिहार के अध्यक्ष के रूप में उर्दू को दूसरी आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अब्दुल मुग़नी मूल रूप से पूर्वी विचारों के आलोचक हैं, जिन्होंने कलीमउद्दीन अहमद के पश्चिमी सोच के मुक़ाबले अपना एक अलग रास्ता बनाया। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'नुक़्ता-ए-नज़र', 'जादा-ए-एतदाल', 'इक़बाल और आलमी अदब', 'तनवीर-ए-इक़बाल', 'इक़बाल का नज़रिया-ए-ख़ुदी', 'अज़मत-ए-ग़ालिब', 'मीर का तग़ज़्ज़ुल', 'फ़ैज़ की शायरी' आदि शामिल हैं। उन्होंने टी.एस. एलियट के संस्कृति के सिद्धांत पर अपना शोध ग्रंथ 'T.S. Eliot's Concept of Culture' लिखा, लेकिन उनका मुख्य क्षेत्र 'इक़बालियात' (इक़बाल का अध्ययन) रहा। उन्होंने अल्लामा इक़बाल को दुनिया का महानतम कवि सिद्ध करने के लिए कलीमउद्दीन अहमद के आक्षेपों का भरपूर जवाब दिया और 'इक़बाल और आलमी अदब' जैसी विशाल पुस्तक लिखी।

उनकी आलोचना में इस्लामी सभ्यता और संस्कृति के प्रति अटूट लगाव और पूर्वी अध्ययन का वर्चस्व स्पष्ट है। उन्हें अक्सर 'कलीमउद्दीन अहमद का विरोधी' (ज़िद) कहा जाता है; जहाँ कलीमउद्दीन तार्किक दलीलों पर ज़ोर देते हैं, वहीं अब्दुल मुग़नी अपनी व्यक्तिगत राय और अंतर्ज्ञान (विजदान) पर अधिक भरोसा करते हैं। उनके विचारों में अक्सर 'अतिशयोक्ति' (ग़ुलू) का तत्व पाया जाता है, जैसे क़ुर्रतुलऐन हैदर को जेम्स जॉयस और वर्जीनिया वुल्फ से श्रेष्ठ घोषित करना। इसके बावजूद, अरबी, फ़ारसी और अंग्रेज़ी साहित्य पर उनकी समान पकड़ उनके शिल्प को गौरव प्रदान करती है।

निधन: 5 सितंबर 2006 को पटना में उनका निधन हुआ

 

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