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पहचान: प्रसिद्ध हकीम, लेखक, शिक्षाविद, पूर्व गवर्नर सिंध और बच्चों के प्रिय लेखक
हकीम मुहम्मद सईद का जन्म 9 जनवरी 1920 को दिल्ली में एक विद्वान और चिकित्सकीय परिवार में हुआ। उनके पूर्वज काशगर (वर्तमान शिनजियांग, चीन) से मुग़ल काल में भारतीय उपमहाद्वीप आए थे। उनके परिवार ने यूनानी चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और विभाजन से पहले हमदर्द वक्फ लैबोरेट्रीज़ की स्थापना की।
प्रारंभिक शिक्षा के दौरान उन्होंने अरबी, फ़ारसी, उर्दू और अंग्रेज़ी भाषाओं में दक्षता हासिल की। बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी. फार्मेसी और मेडिसिनल केमिस्ट्री में बी.एससी. की डिग्री प्राप्त की, और 1945 में वहीं से मास्टर्स भी पूरा किया। इसके बाद 1952 में अंकारा विश्वविद्यालय से फार्मेसी में पीएचडी की डिग्री हासिल की।
पाकिस्तान के गठन के बाद वे कराची आ गए और वहाँ हमदर्द लैबोरेट्रीज़ को पुनः स्थापित किया। 1948 में उन्होंने हमदर्द फाउंडेशन की स्थापना की, जो शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के अनेक प्रोजेक्ट्स का केंद्र बनी।
चिकित्सा के क्षेत्र में उन्होंने पूर्वी (यूनानी) और पश्चिमी चिकित्सा के बीच समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया। वे उन प्रमुख व्यक्तियों में शामिल थे जिन्होंने वैश्विक स्तर पर पूर्वी चिकित्सा को मान्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में भी इसकी अहमियत को उजागर किया।
शिक्षा के क्षेत्र में उनका सबसे बड़ा योगदान हमदर्द यूनिवर्सिटी की स्थापना है, जो मदीनत-उल-हिकमत नामक शैक्षिक परिसर का हिस्सा है। इसमें चिकित्सा, इंजीनियरिंग, आईटी, सामाजिक विज्ञान, कानून आदि के संस्थान शामिल हैं, जबकि बैत-उल-हिकमत पाकिस्तान की प्रमुख लाइब्रेरियों में से एक है।
हकीम मुहम्मद सईद ने साहित्य और शोध के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया। उन्होंने लगभग 200 से अधिक पुस्तकें लिखीं या संपादित कीं, जिनमें चिकित्सा, विज्ञान, धर्म, दर्शन, इतिहास, नैतिकता और बच्चों का साहित्य शामिल है।
उन्होंने कई पत्रिकाओं का संपादन भी किया, जिनमें: हमदर्द मेडिकस, हमदर्द इस्लामिकस, हमदर्द-ए-सेहत, हमदर्द नौनेहाल शामिल हैं।
उन्होंने दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच भी स्थापित किए: हमदर्द शूरा (बुद्धिजीवियों के लिए) और नौनेहाल असेंबली (बच्चों के लिए)।
वे 1981 में वर्ल्ड कल्चरल काउंसिल के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए।
राजनीतिक क्षेत्र में भी उन्होंने सेवाएँ दीं और 19 जुलाई 1993 से 23 जनवरी 1994 तक सिंध प्रांत के गवर्नर रहे।
उन्हें पाकिस्तान सरकार द्वारा सितारा-ए-इम्तियाज़ (1966) और मरणोपरांत निशान-ए-इम्तियाज़ (2002) से सम्मानित किया गया। उनकी जन्मतिथि 9 जनवरी को पाकिस्तान में “बाल दिवस” के रूप में मनाया जाता है।
निधन: 17 अक्टूबर 1998 की सुबह कराची के आराम बाग क्षेत्र में अपने क्लिनिक के बाहर गोलीबारी में उनकी मृत्यु हो गई।