Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

रक़ीब से!

MORE BYफ़ैज़ अहमद फ़ैज़

    रोचक तथ्य

    When Faiz was residing in Sialkot, in a house opposite to that of his, there lived a girl Faiz was in love with. One unfortunate day, on his return from college, Faiz discovered that the girl had left the city. Aagha Naasir writes that years later when Faiz, having risen to popular fame and appeal, revisited Sialkot, he had a serendipitous meeting with the same girl who happened to be visiting the city at the same time. Her husband was keen to meet Faiz. She urged Faiz to take note of her husband. This became an inspiration for 'Raqib Se!'.

    कि वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझ से

    जिस ने इस दिल को परी-ख़ाना बना रक्खा था

    जिस की उल्फ़त में भुला रक्खी थी दुनिया हम ने

    दहर को दहर का अफ़्साना बना रक्खा था

    आश्ना हैं तिरे क़दमों से वो राहें जिन पर

    उस की मदहोश जवानी ने इनायत की है

    कारवाँ गुज़रे हैं जिन से उसी रानाई के

    जिस की इन आँखों ने बे-सूद इबादत की है

    तुझ से खेली हैं वो महबूब हवाएँ जिन में

    उस के मल्बूस की अफ़्सुर्दा महक बाक़ी है

    तुझ पे बरसा है उसी बाम से महताब का नूर

    जिस में बीती हुई रातों की कसक बाक़ी है

    तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंट

    ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने

    तुझ पे उट्ठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें

    तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने

    हम पे मुश्तरका हैं एहसान ग़म-ए-उल्फ़त के

    इतने एहसान कि गिनवाऊँ तो गिनवा सकूँ

    हम ने इस इश्क़ में क्या खोया है क्या सीखा है

    जुज़ तिरे और को समझाऊँ तो समझा सकूँ

    आजिज़ी सीखी ग़रीबों की हिमायत सीखी

    यास-ओ-हिरमान के दुख-दर्द के मअ'नी सीखे

    ज़ेर-दस्तों के मसाइब को समझना सीखा

    सर्द आहों के रुख़-ए-ज़र्द के मअ'नी सीखे

    जब कहीं बैठ के रोते हैं वो बेकस जिन के

    अश्क आँखों में बिलकते हुए सो जाते हैं

    ना-तवानों के निवालों पे झपटते हैं उक़ाब

    बाज़ू तोले हुए मंडलाते हुए आते हैं

    जब कभी बिकता है बाज़ार में मज़दूर का गोश्त

    शाह-राहों पे ग़रीबों का लहू बहता है

    आग सी सीने में रह रह के उबलती है पूछ

    अपने दिल पर मुझे क़ाबू ही नहीं रहता है

    वीडियो
    This video is playing from YouTube

    Videos
    This video is playing from YouTube

    आक़िब साबिर

    आक़िब साबिर

    नूर जहाँ

    नूर जहाँ

    RECITATIONS

    हमीदा चौपड़ा

    हमीदा चौपड़ा,

    नोमान शौक़

    नोमान शौक़,

    हमीदा चौपड़ा

    रक़ीब से! हमीदा चौपड़ा

    नोमान शौक़

    रक़ीब से नोमान शौक़

    स्रोत :
    • पुस्तक : Nuskha Hai Wafa (पृष्ठ 68)

    संबंधित टैग

    यह पाठ नीचे दिए गये संग्रह में भी शामिल है

    ગુજરાતી ભાષા-સાહિત્યનો મંચ : રેખ્તા ગુજરાતી

    ગુજરાતી ભાષા-સાહિત્યનો મંચ : રેખ્તા ગુજરાતી

    મધ્યકાલથી લઈ સાંપ્રત સમય સુધીની ચૂંટેલી કવિતાનો ખજાનો હવે છે માત્ર એક ક્લિક પર. સાથે સાથે સાહિત્યિક વીડિયો અને શબ્દકોશની સગવડ પણ છે. સંતસાહિત્ય, ડાયસ્પોરા સાહિત્ય, પ્રતિબદ્ધ સાહિત્ય અને ગુજરાતના અનેક ઐતિહાસિક પુસ્તકાલયોના દુર્લભ પુસ્તકો પણ તમે રેખ્તા ગુજરાતી પર વાંચી શકશો

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY

    Jashn-e-Rekhta | 8-9-10 December 2023 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate - New Delhi

    GET YOUR PASS
    बोलिए