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असलम आज़ाद

ग़ज़ल 15

नज़्म 5

 

शेर 12

हज़ार बार निगाहों से चूम कर देखा

लबों पे उस के वो पहली सी अब मिठास नहीं

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धूप के बादल बरस कर जा चुके थे और मैं

ओढ़ कर शबनम की चादर छत पे सोया रात भर

रास्ता सुनसान था तो मुड़ के देखा क्यूँ नहीं

मुझ को तन्हा देख कर उस ने पुकारा क्यूँ नहीं

पुस्तकें 8

दस्तावेज़-6-11

 

2010

लहू के मोल

 

1976

Mukhtalif

 

1986

Mukhtalif

 

1987

Nishat-e-Karb

 

1968

Qurrutul Ain Haider : Bahaisiyat Novel Nigar

 

2004

Urdu Novel Azadi Ke Baad

 

1981

Urdu Novel Azadi Ke Bad