aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "alif"
बाबा अलिफ़ ने शब कहा नश्शा-ब-नश्शा कर गिलेजुरआ-ब-जुरआ रंज है जाम-ब-जाम रंज है
अंदोह से हुई न रिहाई तमाम शबमुझ दिल-ज़दा को नींद न आई तमाम शब
क्या ख़लीफ़ा जी ये है है है नहीं से निकलेआगे छुट्टी दो ऐ लो लाम अलिफ़ हमज़ा ये
अल्लाह रे हौसला मिरे क़ल्ब-ए-दो-नीम काजिस ने सबक़ पढ़ा है अलिफ़ लाम मीम का
न तेरे हुस्न-ए-बे-परवा की ग़ायतन कोई हद मिरे ज़ौक़-ए-नज़र की
क़ामत-ए-मौज़ूँ नज़र आए मुझे जा-ए-अलिफ़था शुरू-ए-आशिक़ी दिन मेरी बिस्मिल्लाह का
ये ज़िंदगी तो हो मालूम अल्फ़-लैला काइक इक़्तिबास किसी क़िस्सा-ए-अजीब से है
हर एक इश्क़ के कब क़ाएदे से महरम हैहनूज़ शैख़ अलिफ़ लाम से नहीं वाक़िफ़
हैं साद उस की आँखें और क़द अलिफ़ के मानिंदअबरू है नून-ए-नादिर गेसू है लाम गोया
फिर आज्ञा है जौर का शायद उन्हें ख़यालफिर बढ़ चला है ज़ुल्म-ओ-सितम रोज़गार का
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