aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "avadh"
ढूँढती फिरती है पागल की तरह शाम-ए-अवधलखनऊ तेरे तरहदार कहाँ खो गए हैं
ये दिल-फ़रेब बनारस की सुब्ह का मंज़रअवध की शाम-ए-दिल-आरा हमारे पास तो है
राम-ओ-सीता अवध में जब आएदिल-ए-कौशल्या हुआ मसरूर
शाम-ए-अवध ने ज़ुल्फ़ में गूँधे नहीं हैं फूलतेरे बग़ैर सुब्ह-ए-बनारस उदास है
महके गेसू आरिज़ नौरसशाम-ए-अवध और सुब्ह-ए-बनारस
आशियाँ होता तो होता लौटना भीक्या करे 'पंछी' अवध की शाम ले कर
ग़मों की राह में तस्कीन का मक़ाम तो हैनहीं है सुब्ह-ए-बनारस अवध की शाम तो है
हमीं से सुब्ह-ए-बनारस हमीं से शाम-ए-अवधहमीं से दिल्ली की गलियाँ हसीं थीं ताज-वरो
अवध की शाम रफ़ीक़ों को मह-जबीनों कोहर एक छोड़ के आए थे बम्बई के लिए
खिड़की में सुब्ह वादी-ए-कैलाश का ज़ुहूरउतरे अवध की शाम किसी रोज़ तख़्त पर
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