aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "duty"
थक-हार के बैठे हैं सर-ए-कू-ए-तमन्नाकाम आए तो फिर जज़्बा-ए-नाकाम ही आए
छोड़ कर उस को तिरी बज़्म से क्यूँकर जाऊँइक जनाज़े का उठाना है उठाना दिल का
हुक्म करना भी इक सख़ावत हैहम को ख़िदमत कोई बताया करो
पहले हक़ीक़तों ही से मतलब था और अबएक आध बात फ़र्ज़ भी करने लगा हूँ मैं
मिरा तो फ़र्ज़ चमन-बंदी-ए-जहाँ है फ़क़तमिरी बला से बहार आए या ख़िज़ाँ गुज़रे
हो गया फ़र्ज़ मुझे शौक़ का दफ़्तर लिखनाजब मिरे हाथ कोई ख़ामा-ए-फ़ौलाद आया
कासा-ए-शाम में सूरज का सर और आवाज़-ए-अज़ाँऔर आवाज़-ए-अज़ाँ कहती है फ़र्ज़ निभाना है
मैं ने माँगी थी ये मस्जिदों में दुआ मैं जिसे चाहता हूँ वो मुझ को मिलेजो मिरा फ़र्ज़ था मैं ने पूरा किया अब ख़ुदा ही न चाहे तो मैं क्या करूँ
दर्द का कहना चीख़ ही उट्ठो दिल का कहना वज़्अ निभाओसब कुछ सहना चुप चुप रहना काम है इज़्ज़त-दारों का
पिया बाज प्याला पिया जाए नापिया बाज यक तिल जिया जाए ना
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