aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "gash"
किस फ़ुर्सत-ए-विसाल पे है गुल को अंदलीबज़ख़्म-ए-फ़िराक़ ख़ंदा-ए-बे-जा कहें जिसे
क़ातिल को दुआएँ दो कि 'फ़ारिग़'हर ज़ख़्म-ए-वफ़ा ग़ज़ल-सरा है
क़ातिल को दुआएँ दो कि 'फ़ारिग़'हर ज़ख़्म-ए-वफ़ा ग़ज़ल-सरा है
दवा भी देते रहते हैं लगा देते हैं चरका भीग़रज़ ये है मरीज़-ए-ग़म कहीं अच्छा न हो जाए
हर एक ज़ख़्म-ए-तमन्ना हरा-भरा है अभीहर एक ज़ख़्म है ज़ख़्म-ए-हयात की सूरत
शाख़-ए-शमशीर पे लो ज़ख़्म-ए-बहाराँ महकेरुत बदलते ही बदल जाता है जंगल का मिज़ाज
ये आगही है किसी हादसे के आमद कीबदन का सारा असासा बिखरने वाला है
जहान-ए-हादसा-आगीन में बशर का वरूदगुज़र हबाब का दरिया-ए-मौजज़न की तरफ़
चाक-दामानी-ए-आशिक़ ने ग़ज़ब कर डालाऐ मिरे पर्दा-नशीं खुल गया पर्दा तेरा
ज़ि-बस कि आतिश-ए-ग़म शोला-ज़न है सीने मेंगिरीं हैं अश्क की जागह शरार आँखों से
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