aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "plate"
मेरे दामन में आ गिरे सारेजितने तश्त-ए-फ़लक में तारे थे
भगवान ही भेजेंगे चावल से भरी थालीमज़लूम परिंदों की मासूम सभाओं में
वो मुफ़्लिसी के दिन भी गुज़ारे हैं मैं ने जबचूल्हे से ख़ाली हाथ तवा भी उतर गया
हमारा मलबा हमारे क़दमों में आ गिरा हैप्लेट में जैसे मोम-बत्ती पिघल गई हो
जैसे इक हरीजन लड़की मंदिर के दरवाज़े परशाम दियों की थाल सजाए झाँक रही है आँखों में
बहुत ही ज़ोर से पीटे हवा के बैन पर सीने हमारे ख़ैर-ख़्वाहों नेकि चाँदी के वरक़ जैसा समय ने जब हमें कूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे
सब ने भर-पेट खा लिया खानामाँ की थाली में कुछ निवाले थे
इक नुक़रई खनक के सिवा क्या मिला 'शकेब'टुकड़े ये मुझ से कहते हैं टूटी प्लेट के
फिर पानियों में नुक़रई साए उतर गएफिर रात जगमगा उठी चाँदी के थाल से
कटोरा ही नहीं है हाथ में बस फ़र्क़ इतना हैजहाँ बैठे हुए हो तुम खड़े हम भी वहीं बाबा
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