aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "shout"
है तो बारे ये आलम-ए-असबाबबे-सबब चीख़ने लगा कीजे
रंग हर रंग में है दाद-तलबख़ून थूकूँ तो वाह-वा कीजे
तारों की आँख भी भर आई मेरी सदा-ए-दर्द परउन की निगाहें भी तिरा नाम बता के रह गईं
चीख़ते हैं दर-ओ-दीवार नहीं होता मैंआँख खुलने पे भी बेदार नहीं होता मैं
सिलवटें चीख़ती रहती हैं मिरे बिस्तर कीकरवटों में ही मिरी रात कटा करती है
मस्लहत-कोशी-ए-अहबाब से दम घुटता हैकिसी जानिब से कोई नारा-ए-याहू आए
मिरे वजूद का सहरा है मुंतज़िर कब सेकभी तो आ जरस-ए-ग़ुंचा की सदा की तरह
तुम्हारे सर पे बगूले भी आ के चीख़ेंगेमगर भुलाना नहीं मेरी बात चुप रहना
मिस्ल-ए-कलीम हो अगर मारका आज़मा कोईअब भी दरख़्त-ए-तूर से आती है बाँग-ए-ला-तख़फ़
अज़ाँ देते हैं बुत-ख़ाने में जा कर शान-ए-मोमिन सेहरम के नारा-ए-नाक़ूस हम ईजाद करते हैं
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books