aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "Asghar Nadeem Syed"
असग़र नदीम सय्यद
born.1949
शायर
ऐ ख़ामोशी!मेरे ख़ून में छुप के बैठदुल्हन बन के मेरे चेहरे पर शर्माआज की शबइस ख़ून में दरिया रोएँगेऔर बच्चे शोर मचाएँगेऐ ख़ामोशी!कफ़न हो जैसे रंगत से महरूमतुझ में भी कुछ ऐसी बे-लफ़्ज़ी का मौसम फैलेतू भी दम तोड़े मेरी आँखों मेंउन साँपों मेंजो साँसों में फुंकारते हैंऐ ख़ामोशी! तारों से उतरतारीकी के इम्काँ से उभरऐ ख़ामोशी!
मुझे एक दिन चाहिएचाहे छुट्टी का दिन होया अपने इरादों के पुल से गुज़रने काया सेब खाने का दिन होमुझे एक दिन चाहिएचाहे साहिल पे जा कर नहाने का दिन होया अपनी पसंदीदा मौसीक़ी सुनने का दिन होदरख़्तों में छुप कर किसी से लिपटने का दिन होया फिर कोई दिनमेरी ताक़त में डूबा हुआमेरे ग़ुस्से की हद से निकलता हुआऐसा दिनजो खुले आसमाँ की तरह अपनी बाँहों को खोलेमुझे एक दिन चाहिएताकि मैं अपने प्यारों के दिल मेंटपकते हुए आँसुओं कोख़ुशी के समुंदर में तब्दील कर दूँमुझे एक दिन चाहिए
आज तुम ऐसे हँसेजैसे कोई आज़ाद कर दे सैकड़ों क़ैदी परिंदेशोर करते आसमाँ की सम्तया बारिश समुंदर पर गिरे रफ़्तार मेंया धूप खिल जाए भरी बरसात मेंतुम गूँज हो ख़ुशियों के त्यौहारों कीजो हम भोलपन में अपने बचपन के सफ़र में भूल बैठे हैंतुम्हें किस ने कहाइतना हँसो कि बाल खुल जाएँतुम्हें किस ने कहाये सादगी का ज़ाइक़ा तज्वीज़ कर लोकिन बहादुर रास्तों पर तुम नेअपने नाम की मोहरें लगाई हैंतुम्हें ये धूप का ज़ेवर सितंबर की निशानी हैसितंबर मेरे होंटों मेरी आँखों में समाया हैसितंबर आ चुका है मेरे दिल मेंऔर मेरे जिस्म के आहंग में तब्दील होता जा रहा हैतुम हँसी में गीत हँसती जा रही होकितना मुश्किल है हँसी का गीत में तब्दील हो जानाबहुत मुश्किलमगर ऐसे बहादुर रास्तों पर सिर्फ़ आज़ादीहँसी के गीतऔर तेरे खुले बालों मेंपुर्वाई चलेगीदेर तक और दूर तक
मेरे घर के सामनेरात की गाड़ी का एक पहिया निकल गयामेरा बेटा उस पहिए से खेलता हैगाड़ी को लेने कोई नहीं आयाउस दिन से मेरे घर मेंअख़बार नहीं आयादूध नहीं आयापरिंदा नहीं आयाउस दिन के ब'अदमैं ने अपनी नज़्म में कोई शिकार नहीं खेलामैं अपनी नज़्म के अंदर ख़ामोश हो गयाऔर मेरी नज़्म आहिस्ता आहिस्ता मेरे लिए पिंजरा बन गईरात की गाड़ी को लेने कोई नहीं आयाउन्हों ने जान-बूझ के ऐसा किया हैवो मेरे दिल में बची-खुची चीज़ों को शिकार करना चाहते हैंशायद वो नक़्शा चुराना चाहते हैंकुछ लोग रात की गाड़ी से नीचे उतरेमेरे अनाज के कमरे और मेरी नज़्मों की तलाशी लीअपनी हिफ़ाज़त के लिएकुछ हथियार मैं ने इन नज़्मों में छुपा रक्खे थेअब मेरे पास चंद डरे हुए लफ़्ज़ों और छान-बूरे के सिवा कुछ नहींउन्हों ने मेरे बेटे की किताबें छीन लींऔर अपनी लिखी हुई किताबें दे दींऔर कहा हम तुम्हारे ही घर मेंतुम्हारी नज़्मों के लिए एक मुख़्बिर तय्यार करना चाहते हैंरात की गाड़ी का पहिया मुझे अपने सीने में उतरता हुआ महसूस हुआमेरे घर की हर शय पहिए में बदल गईहत्ता कि मेरी बातें भी पहिया बन गईंऔर फिर ये पहिया मेरी तारीख़ बन जाएगाइस तारीख़ से बहुत सारे बच्चे पैदा होंगेवो रात की इस गाड़ी को खींचेंगेलेकिन उस वक़्त तक रातअपनी जड़ें छोड़ चुकी होगी
जब हम दोनों जुदा हुए थेउस ने पहनी सरमा की रातों में निकले चाँद की साड़ीमैं ने पहनाअपनी बन-बासी का चोलाउस ने माँगी धूपजो बर्फ़ों पर चमकी थी और हँसी के दरिया में बहते हुएहम तक पहुँची थीमैं ने माँगी घास में गिरी हुई आवाज़उस के हाथ मेंआठ पहर के ख़्वाब का छोटा बच्चा थामेरे हाथ में वक़्त ने अपने बीज से बाहर पाँव रखाउस की आँख में नाव डूबीमेरी आँख में एक परिंदा डर के दुबकाउस के होंट पे मेरे नाम का साया थामेरे होंट पे उस के जिस्म की बारिश थीउस के दिल में गुम-गश्ता तहज़ीबों जैसी ख़ामोशी थीमेरे दिल में तेज़ हवा की याद में खोया मौसम थाउस के पाँव हैरत की सीढ़ी से नीचे उतर रहे थेमेरे पाँव दिल की ज़मीं से लिपट रहे थेजब हम दोनों जुदा हुए थेआधा बोसा आधा आँसू दिल में रहा
अधूरी कुल्लियात
कुल्लियात
Jahanabad Ki Galiyan
नॉवेल / उपन्यास
Kahani Mujhe Mili
अफ़साना
Aadhe Chand Ki Rat
Tarz-e-Ehsas
मज़ामीन / लेख
Syed Waqar Azeem: Shakhsiyat Aur Fan
भाषा एवं साहित्य
मेरे दिल में जंगल हैऔर उस में भेड़िया रहता हैजो रात को मेरी आँखों में आ जाता हैऔर सारे मंज़र खा जाता हैसुब्ह को सूरज अपने प्याले से शबनम टपकाता हैऔर दिन का बच्चामेरी रूह के झूले में रख जाता हैमेरे दिल में जंगल हैऔर उस में फ़ाख़्ता रहती हैजो अपने परों से मेरे लिएइक परचम बुनती रहती हैऔर ख़ुशबू से इक नग़्मा लिखती रहती हैफिर थक कर मेरे बालों में सो जाती हैमेरे दिल में जंगल हैऔर उस में जोगी रहता हैजो मेरे ख़ून से अपनी शराब बनाता हैऔर अपने सितार में छुपी हुई लड़की कोपास बुलाता हैफिर जंगल बोसा बन जाता हैमेरे दिल में जंगल हैऔर इस में भूला-भटका ज़ख़्मी शहज़ादा हैजिस का लश्करख़ून की धार पे उस के पीछे आता हैवो अपने वतन के नक़्शे को ज़ख़्मों पे बाँध केआख़िरी ख़ुत्बा देता हैफिर मर जाता हैमेरे दिल में जंगल हैऔर उस में गहरी ख़ामोशी है
सूरज आसमान से गिराऔर लेमूँ बन गयाचाँद आसमान से गिराऔर कपास का फूल बन गयामैं तारीख़ के मीनार से गिराऔर वाक़िआ क्यूँ न बन सका
मेरे दिन सैराब हुए हैंनींदें घोर समुंदर जैसीमेरी आँख से लिपटी हैंसुब्ह की साअत आज़ादों का गीत बनी हैसाथ चली है सय्याहों के रस्ते परमैं एक सवारसदा के रथ पर बैठ के जाऊँसूरज-मुखी के जलसे मेंबात करूँ त्यौहारों कीजो मेरे वस्ल के दरवाज़ों तक आ पहुँचे हैंमेरी उम्र के खलियानों मेंजिन की फ़सलें नए निसाब से उतरी हैंबात करूँ उस निस्बत कीजो फूल उतरते मौसम की पोशाक में आईतेरे दिल में मेरे दिल मेंकैसे अपनी भाषा से मैं शहद बनाऊँकैसे दूध कशीद करूँउन बातों से जो सब की जानी-बूझी हैंमेरे दिन सैराब हुए हैंजैसे सूरज और कबूतर उड़ जाते हैंअपने अपने डरबों सेजैसे पानी बह जाता है दरियाओं के आँगन सेऐसे ही मेरे दिन क्या मालूम?कहाँ तक जाएँकिन रिश्तों में जागना चाहें
बाँसुरी की धुन से चावल की बाली तकदिन फैला हैऔर दरांती वाले हाथ में उस का दामनजैसे मल्लाहों के हाथ में जाल होया फिर घोड़-सवार के हाथ में उस की रासेंदिन फैला हैदही बिलोने की आवाज़ से जामुन के पेड़ों तकचूड़ियाँ पहनने वाले हाथ में उस का दामनखिंचते खिंचते ओढ़नी बन जाएगादिन फैला हैआसमान से बच्चे की नन्ही मुट्ठी तकरफ़्ता रफ़्ता दूध में ढल जाएगादिन फैला हैरेल की आहनी पटरी परऔर भाग रहा है छोटे शहरों की मंडी तकभागते भागते सुर्ख़ अनार में ढल जाएगादिन फैला हैगेंदे के फूलों मेंमैले बच्चों की ख़ाली जेबों मेंदिन फैला हैमेरी तेरी आँखों मेंजो रफ़्ता रफ़्ता मुस्तक़बिल की धुन पे गायाउजले पानियों जैसा कोईगीत बनेगा
ऐ दोस्त! कभी तो आ के मिलये दिल तेरे लिए जारी हैदिल जारी हैदिल आठ पहर से जारी हैजैसे कोई दरिया सावन मेंजैसे कोई बरखा जाड़े मेंऐसे में बदरी कारी हैदिल जारी हैदिल आठ पहर से जारी हैकभी दिल दो-गुना हो जाता हैजब तेरा दर्द समाता हैहर साँस में रस मिल जाता हैतेरे होने कातेरे नींद-नगर में आने कादिल जारी हैदिल अज़लों-अज़ल से जारी हैतुझे नींद समझ के सो लूँ मैंऔर ओढ़ के जीवन कर लूँ मैंये नींद अधूरी होती हैकहीं सपने में खुल जाती हैतुझे कैसे ओढूँ कम्बल मेंतुझे कैसे पहनूँ जाड़े मेंतुझे कैसे बीतूँ बरसों मेंजो बीत चुका वो बादल थाअब बीतना चाहूँ लिबासों मेंतुझे ओढ़ना चाहूँ कपासों मेंकभी आ के मिलऐसे कि अचानक धूप खुलेऐसे कि अचानक शाम ढलेऐसे कि अचानक दर्द उठेमेरी नस नस मेंऔर तू उस दर्द में शामिल हो
आसमाँ ठहरा हुआ नीला समुंदरऔर ज़मीं सूखा हुआ दरियापहाड़ों पर दिसम्बर आ चुका हैनीलगूँ गहरा दिसम्बरनद्दियाँ बर्फ़ों की चाँदी में छुपी हैंमुंसिफ़ों जैसे मुअज़्ज़िज़ ये पहाड़ और उन के हम-साया शजरमरऊब करते हैंदेहाती रास्तों के फूल कहते हैंहमें गाओनशेबी बस्तियों की घास कहती हैहमें लिक्खोफटे कपड़ों में मुख़्लिस लड़कियाँ कहती हैंहम भी लफ़्ज़ हैंहम भी सदा का ज़ाइक़ा हैंआसमाँ ठहरा हुआ नीला समुंदरदूध पीता मेमना लफ़्ज़ हैसारी ज़मीं फैली हुई इक नज़्म हैऔर मैं कभी बारिशकभी सूखा हुआ दरियाकभी आवाज़ मुख़्लिस लड़कियों की
ये साठ सदी का क़िस्सा हैये साठ बरस की बात नहींतारीख़ ने जब आँखें खोलींसब पानी थाफिर पानी पर तस्वीर बनीतस्वीर ज़मीं पर फैल गईऔर उस पर बारिश टूट पड़ीइक बीज कहीं परसाठ सदी की आहट से बेदार हुआजंगल बन कर फैल गयावहीं कहीं पर मैं भी थातुम भी थींतारीख़ ने दस्तक दी थीतारीख़ उतरी थी धरती परवो रात थी पूरन-माशी कीफिर धरती ही तारीख़ बनीतारीख़ कोई बंदर तो नहींतारीख़ कोई चेहरा तो नहींतारीख़ तो एक समुंदर हैजो पूरन-माशी की रातों मेंपागल हो कर फैलता हैऔर सब को बहा ले जाता है
दिल का फैलाव तो ज़मीन का फैलाव हैगंदुम फल शीशम और पानीफिर लड़की और हवा मेंनग़्मा दिल के परिंदों काइन ज़िंदों का जो ग़ैर-मुनाफ़ा-बख़्श ज़मीन पे रहते हैंपानी शीशम बच्चा लड़की तेज़ हवा और फल मेंख़्वाब है सुब्ह-ए-सादिक़ काउन औरतों का जो दूसरों की मर्ज़ी से ब्याही जाती हैंउन बोसों काजो गाड़ी की सीटी से डर जाते हैंशहर में कौन हैजिस ने आँख में दरियादिल में समुंदरदेखा और तस्लीम किया हैदिल का फैलाव तो ज़मीन का फैलाव हैजिस में पानी शीशम गंदुम बच्चालड़की तेज़ हवा और फल कीरिहाइश-गाहें हैं
शाम का पिंजरा मेरे जिस्म पे गिर जाता हैऔर मैं दर्जा दोम का क़ैदीदुश्मन के अख़बार से पूरी दुनिया के लोगों की बिगड़ती शक्लें देखने लगता हूँऔर सूरज की आज़ादीमेरे जीने की ख़्वाहिश को अपना दोस्त बनाने आ जाती हैमेरे नाश्ते के बर्तन में मेरी मोहब्बत के बरसों का सारा ज़ाइक़ा भर जाता हैसिगरेट के हर कश से दरिया खींच आते हैंऔर परिंदे अपनी औलादों को मेरे गीत का चोगा देते हैंजब मेरे पाँव उन के बनाए ज़ाब्तों की दलदल में धँस जाते हैंमेरी आँखें लाखों मील सफ़र कर जाती हैंऔर मेरे बाज़ू रेल की दोनों पटरियाँ बन कर फैलते हैंजब मेरी रगों में शायरी ख़ून बनाती हैमैं शाम का पिंजरा तोड़ के बाहर आ जाता हूँमेरे पाँव के सब रिश्ते इक दूजे से जुड़ जाते हैंमेरे लफ़्ज़ दरख़्तों के गुम्बद में कबूतर बन के गटलने लगते हैंमें अपने सिरहाने बैठे नेरूदा से कुछ बातें पूछता हूँ
उस ने मुझे धूप-भरी अजरक पेश कीमैं ने उस धूप को अपनी ज़मीन पर रखाकपास और खजूर उगाईखजूर से शराब और कपास से अपनी महबूबा के लिएमहीन मलमल कातीमलमल ने उस के बदन को छुआउस पर फूल निकल आएशराब को ज़मीन में दबायाउस पर ताड़ के दरख़्त उग आएइस ने मुझे धूप-भरी अजरक पेश कीमैं ने उस धूप को अपने दिल पर रखाजो सरसों का फूल बन गईउस फूल से एक मौसम पैदा हुआजिस का नाम मैं ने इश्क़ और सख़ावत का मौसम रख दियाउस मौसम के बीज से एक रास्ताउस के घर की तरफ़ निकलाउस बीज से पाँच कबूतर निकलेभरी हुई गागर वाले फ़क़ीर के रौज़े पर जा कर बैठ गएउस ने मुझे धूप से भरी अजरक पेश कीमैं ने उसे तुम्हारे घर के ज़ीने पर फैला दियाताकि तुम धूप की सीढ़ियों से मेरे दिल में उतर सकोमुझे याद है कभी न कभी कहीं न कहींमेरा सितारा तुम्हारे सितारे के क़रीब से गुज़रा हैउस ने मुझे धूप-भरी अजरक पेश कीमैं ने उसे समुंदर में फैला दियाहवा ने उस का रस चूसाऔर मदहोश हो कर बादबानों से लिपट गईसमुंदर के अंदर एक और समुंदर नींद से जागादोनों एक दूसरे के ख़रोश मेंदेर तक इस धूप में आँखें मूँदे लेटे रहेइस ने मुझे धूप-भरी अजरक पेश कीफिर मैं ने वो अजरक शहबाज़ क़लंदर के एकफ़क़ीर को दे दीउस ने मुझे दुआ का एक बादल दियामैं जिसे अपने सर पर लिए फिरता हूँ
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