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नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
हज़ारों साल से जीते चले आए हैं मर मर के
शुहूद इक फ़न है और मेरी अदावत बे-फ़नों से है
जौन एलिया
ग़ज़ल
फ़ना बुलंदशहरी
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विषय
चाक
चाक शायरी
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रेख़्ता शब्दकोश
chaahe
चाहेچاہے
' यदि जी चाहे ' का संक्षिप्त रूप। यदि जी चाहे। यदि मन में आवे। जैसे-(क) चाहे यहाँ रहो, चाहे वहाँ। (ख) जो चाहे सो करो।
chaa.e
चायچائے
एक पौधा जिसके पत्तों को जोश दे कर और अर्क़ निकाल कर पीते हैं अर्थात उस पौधे के पत्ते को भी चाय कहते हैं
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ग़ज़ल
चाय में चीनी मिलाना उस घड़ी भाया बहुत
ज़ेर-ए-लब वो मुस्कुराता शुक्रिया अच्छा लगा
अमजद इस्लाम अमजद
नज़्म
मजबूरियाँ
वो बादल सर पे छाए हैं कि सर से हट नहीं सकते
मिला है दर्द वो दिल को कि दिल से जा नहीं सकता
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
तेरी आवाज़
रात सुनसान थी बोझल थीं फ़ज़ा की साँसें
रूह पर छाए थे बे-नाम ग़मों के साए


