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ग़ज़ल
मैं अपने ज़िम्मे किसी का हिसाब क्यूँ रक्खूँ
जो नफ़ा है उसे जेब-ए-ज़ियाँ में रख देना
फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी
ग़ज़ल
इब्न-ए-इंशा
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रेख़्ता शब्दकोश
jab aa.nkhe.n chaar hotii hai.n muravvat aa hii jaatii hai
जब आँखें चार होती हैं मुरव्वत आ ही जाती हैجَب آنکھیں چار ہوتی ہیں مُرَوَّت آ ہی جاتی ہے
सामना होने पर लिहाज़ अर्थात ख़याल करना ही पड़ता है
sab jiite jii ke jhag.De hai.n ye teraa hai ye meraa hai jab chal base is duniyaa se naa teraa hai naa meraa hai
सब जीते जी के झगड़े हैं ये तेरा ये मेरा है जब चल बसे इस दुनिया से ना तेरा है ना मेरा हैسَب جیتے جی کے جَھگڑے ہیں یہ تیرا ہے یہ میرا ہے جَب چَل بَسے اِس دُنیا سے نَا تیرا ہے نَا میرا ہے
मौत के वक़्त कोई चीज़ साथ नहीं जाती, यह सब ज़िंदगी के ही झगड़े हैं
jab aa.nkhe.n chaar hotii hai.n muhabbat aa hii jaatii hai
जब आँखें चार होती हैं मुहब्बत आ ही जाती हैجَب آن٘کھیں چار ہوتی ہیں محبت آ ہی جاتی ہے
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ग़ज़ल
अहद-ए-वफ़ा को तोड़ के हम भी हैं मुज़्महिल
तुम भी उधर हो चाक गरेबाँ किए हुए
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
ग़ज़ल
मैं वो हूँ आशिक़-ए-दीवाना गर मुझे की पंद
ब-रंग-ए-जैब उड़ा दूँगा धज्जियाँ नासेह
असद अली ख़ान क़लक़
ग़ज़ल
चाक-ए-जिगर-ओ-दिल का जब शिकवा बजा होता
यूसुफ़ का ज़ुलेख़ा ने दामन तो सिया होता
क़ुर्बान अली सालिक बेग
ग़ज़ल
नज़र वालो ज़रा चाक-ए-गरेबाँ देखते जाओ
इसे चाक-ए-नक़ाब-ए-रू-ए-जानाँ कर दिया हम ने
इज्तिबा रिज़वी
ग़ज़ल
कमाल-ए-दीवानगी तो जब है रहे न एहसास-ए-जैब-ओ-दामन
अगर है एहसास-ए-जैब-ओ-दामन तो फिर जुनूँ होशियार सा है
निहाल सेवहारवी
ग़ज़ल
कमाल-ए-दीवानगी तो जब है रहे न एहसास-ए-जैब-ओ-दामन
अगर है एहसास-ए-जैब-ओ-दामन तो फिर जुनूँ होशियार सा है
निहाल सेवहारवी
ग़ज़ल
रफ़ू किया किए चाक-ए-वफ़ा-ओ-तार-ए-क़बा
वो रूठते रहे और हम उन्हें मनाए गए