aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "isti.aara"
ज़ेब बरैलवी
शायर
जगजीवन लाल आस्थाना सहर
लेखक
मकतबा इस्तेआरा, नई दिल्ली
पर्काशक
मक्तबा इस्तेआरा, जामिया नगर, नई दिल्ली
इस्तेआरा पब्लिकेशंज़, नई दिल्ली
इसतेआरा पब्लिकेशन, इस्लामाबाद
आसताना बुक डिपो, दिल्ली
बज़्म-ए-अासताना शह मीरिया,कडिया
जसवन्त रॉय अशठाना
ईश्वर नाथ टोपा
इस्तिफ़ा लखनवी
शोबा-ए-नश्र-ओ-इशाअत आसताना-ए-आलिया हज़रत बाबा फ़रीदी, रजबपुर
आसतान-ए-आलिया अशरफ़िया सरकार-ए-कलाँ कछोछा शरीफ़, फ़ैज़ाबाद
Eshear Chandra
आस्ताना आलिया वार्सिया, रावलपिंडी
बादबाँ खुलने से पहले का इशारा देखनामैं समुंदर देखती हूँ तुम किनारा देखना
तो ये जान लेना वो इस्तिआ'रा था मेरे दिल काअगर न आए
आज सब कहते हैं जिस को नाख़ुदाहम ने उस को पार उतारा था कभी
शब वही लेकिन सितारा और हैअब सफ़र का इस्तिआ'रा और है
गुलाब हाथ में हो आँख में सितारा होकोई वजूद मोहब्बत का इस्तिआ'रा हो
इस्ति'आराاِسْتِعارَہ
उधार लेना, ऋण लेना, माँगना
इस्तिफ़ादाاِسْتِفادَہ
किसी से लाभान्वित होना, नफ़ा उठाना
इस्तिख़ाराاِسْتِخارَہ
किसी कार्य में आस्मानी सहायता चाहना, परोक्ष ज्ञान की इच्छा करना, किसी धार्मिक कृति द्वारा यह जानना कि अमुक काम शुभ है या अशुभ
तख़्लीक़, तख़ईल और इस्तिआरा
मुईद रशीदी
शायरी तन्क़ीद
शुमारा नम्बर-010-011
हक़्क़ानी अल-क़ासिमी
इस्तिआरा
Naye Afsane Ka Manwi Isteara
राशिद अनवर राशिद
शुमारा नम्बर-012,013
सलाहुद्दीन परवेज़
Shumara Number-002,003
Sep 2002इस्तिआरा
Shumara Number-001
Jan, Feb, Mar 2001इस्तिआरा
Shumara Number-010,011
Mar, Oct 2003इस्तिआरा
Shumaara Number 012, 013
Mansoor Khushtar Nayi Subha Ka Istiara
कामरान ग़नी सबा
शुमारा नम्बर-001
002
Apr, May, Jun 2001इस्तिआरा
Shumaara Number 002, 003
Shumara Number-017, 018
Jul, Aug, Sep, Oct, Nov, Dec 2004इस्तिआरा
Shumara Number-019
Shumara Number-002
और कल को मजमे में भी मिलना थामैं ने भीड़ की तरफ़ इशारा किया तो बोला
तुम्हारे ज़िक्र से याद आए क्या घटा के सिवाहमारे पास कोई और इस्तिआरा नहीं
उक़ूबतों के सफ़र पे निकला मैं इक सितारा हूँ आगही काअजल के हाथों में हाथ डाले इक इस्तिआ'रा हूँ ज़िंदगी का
हवाओं की दस्तरस में कब हूँ जो बुझ रहूँगामैं इस्तिआरा हूँ रौशनी का दिया नहीं हूँ
ब-नाम-ए-ताक़त कोई इशारा नहीं चलेगाउदास नस्लों पे अब इजारा नहीं चलेगा
मगर गिरफ़्त में आता नहीं बदन उस काख़याल ढूँढता रहता है इस्तिआरा कोई
छोड़ आया था मेज़ पर चायये जुदाई का इस्तिआरा था
इस्तिआ'रा जो मज़े का हो मज़े की तश्बीहइस में इक लुत्फ़ है इस कहने का फिर क्या कहना
एक मुश्त-ए-ख़ाक और वो भी हवा की ज़द में हैज़िंदगी की बेबसी का इस्तिआरा देखना
शब वही लेकिन सितारा और हैअब सफ़र का इस्तिआरा और है
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