aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "khasaare"
मोहम्मद यार ख़ाकसार
शायर
खाकसार गज़नफर अली
लेखक
मतबअ कैसर-ए-हिंद, इलाहाबाद
पर्काशक
ज़ुलाली खानसारी
ख़ाक़ान-ए-हैदर
मधू खराटे
संपादक
अहमद बिन उमर अल-ख़स्साफ़
सय्यद ख़ाकसार अली शाह चिशती क़ादरी इफ़्तिख़ारी
मोहम्मद यूसुफ़ खतरी
क़ैसर-ए-हिन्द प्रेस, फैज़ाबाद
मतबा क़ैसर-ए-हिन्द, लुधियाना
बज़्म-ए-ख़ासान-ए-अदब, हैदराबाद
मतबअ कैसर-ए-हिंद, आगरा
मतबा क़ैसर-ए-हिन्द, दिल्ली
बाबुल इशाअत ख़ाकसार तहरीक, लाहाैर
क्या झगड़ा सूद ख़सारे काये काज नहीं बंजारे का
जिस तरह लोग ख़सारे में बहुत सोचते हैंआज कल हम तिरे बारे में बहुत सोचते हैं
अपने अपने घर जा कर सुख की नींद सो जाएँतू नहीं ख़सारे में मैं नहीं ख़सारे में
किसी का अपना मोहब्बत में कुछ नहीं होताकि मुश्तरक हैं यहाँ सूद भी ख़सारे भी
सिर्फ़ मैं ही नहीं बाज़ार की मंदी का शिकारजेब में ले के ख़सारे तो सभी जाएँगे
ख़ाकसारी शायरी
ख़साराخَسارَہ
नुक़्सान, घाटा, हानि
ख़साराخَسارا
खारेکھارے
salty
ख़सरخَسَر
घाटा, हानि, क्षति
Khatam-e-Sulaimani
शाह ग़ुलाम हसनैन नदवी
आत्मकथा
E Commerce
Khawas-e-Lemoon
हकीम मोहम्मद अब्दुल्लाह
औषधि
Is Aabad Kharabe Me
अख़्तरुल ईमान
Aamal-e-Qurani (Khawas-e-Furqani)
मौलाना अशरफ़ अली थानवी
इस्लामियात
Khawas-e-Arand
Khawas-e-Fitkiri
तिब्ब-ए-यूनानी
Khaksar Tahreek Aur Aazadi-e-Hind: Dastavezat
ए. डी. मुज़्तर
धार्मिक आंदोलन
Khawas-e-Dhatoora
Khawas-e-Mooli
Al-Khasais-ul-Kubra
अल्लामा जलालुद्दी सुयूती
समा और अन्य शब्दावलियाँ
Khawas-e-Lahsan
ख़ुफ़िया ख़ज़ाने का राज़
बाल-साहित्य
Khursheed Khawari
सय्यद फ़ज़ल अली वक़ार
मर्सिया
Shumaara Number-001
Mar 1888खंजर-ए-इश्क़, लख़़नऊ
राएगानी का वो 'आलम है कि यूँ लगता हैमेरे हिस्से में ख़सारे भी नहीं आएँगे
ख़सारे जितने हुए हैं वो जागने से हुएसो हर तरफ़ से सदा है के जा के सो जाओ
धूप में साया बने तन्हा खड़े होते हैंबड़े लोगों के ख़सारे भी बड़े होते हैं
जो लोग दुश्मन-ए-जाँ थे वही सहारे थेमुनाफ़े थे मोहब्बत में ने ख़सारे थे
मैं अभी पहले ख़सारे से नहीं निकला हूँफिर भी तय्यार है दिल दूसरी नादानी पर
अपने हिस्से में ही आने थे ख़सारे सारेदोस्त ही दोस्त थे बस्ती में हमारे सारे
कभी दिमाग़ को ख़ातिर में हम ने लाया नहींहम अहल-ए-दिल थे हमेशा रहे ख़सारे में
रात भर जाग के हम ने जो कमाई की हैउस से तो दिन के ख़सारे भी नहीं निकलेंगे
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