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नज़्म
शिकवा
ख़ूगर-ए-पैकर-ए-महसूस थी इंसाँ की नज़र
मानता फिर कोई अन-देखे ख़ुदा को क्यूँकर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
दरख़्त-ए-ज़र्द
हदफ़ होंगे तुम्हारा कौन तुम किस के हदफ़ होगे
न जाने वक़्त की पैकार में तुम किस तरफ़ होगे
जौन एलिया
नज़्म
ए'तिराफ़
अब मिरे पास तुम आई हो तो क्या आई हो
मैं ने माना कि तुम इक पैकर-ए-रानाई हो
असरार-उल-हक़ मजाज़
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नज़्म
मता-ए-ग़ैर
मेरी उजड़ी हुई नींदों के शबिस्तानों में
तू किसी ख़्वाब के पैकर की तरह आई है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
परछाइयाँ
उस शाम मुझे मालूम हुआ इस कार-गह-ए-ज़र्दारी में
दो भोली-भाली रूहों की पहचान भी बेची जाती है
साहिर लुधियानवी
नज़्म
मस्जिद-ए-क़ुर्तुबा
इश्क़ की मस्ती से है पैकर-ए-गिल ताबनाक
इश्क़ है सहबा-ए-ख़ाम इश्क़ है कास-उल-किराम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
ख़िज़्र-ए-राह
पुख़्ता-तर है गर्दिश-ए-पैहम से जाम-ए-ज़िंदगी
है यही ऐ बे-ख़बर राज़-ए-दवाम-ए-ज़िंदगी
अल्लामा इक़बाल
शेर
हम ने हँस हँस के तिरी बज़्म में ऐ पैकर-ए-नाज़
कितनी आहों को छुपाया है तुझे क्या मालूम
मख़दूम मुहिउद्दीन
ग़ज़ल
सबा अफ़ग़ानी
ग़ज़ल
तिरा पैकर ख़ुदा ने भी तो फ़ुर्सत में बनाया था
बनाएगा तिरे ज़ेवर सुनार आहिस्ता आहिस्ता
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
किस से मोहब्बत है
सरापा रंग-ओ-बू है पैकर-ए-हुस्न-ओ-लताफ़त है
बहिश्त-ए-गोश होती हैं गुहर-अफ़्शानियाँ उस की










