aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
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जब भी आता है मिरा नाम तिरे नाम के साथजाने क्यूँ लोग मिरे नाम से जल जाते हैं
दिल के फफूले जल उठे सीने के दाग़ सेइस घर को आग लग गई घर के चराग़ से
हमारी मुस्कुराहट पर न जानादिया तो क़ब्र पर भी जल रहा है
बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैंकि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं
जला है जिस्म जहाँ दिल भी जल गया होगाकुरेदते हो जो अब राख जुस्तुजू क्या है
पेड़ के काटने वालों को ये मालूम तो थाजिस्म जल जाएँगे जब सर पे न साया होगा
इस शहर को रास आई हम जैसों की गुम-नामीहम नाम बताते तो ये शहर भी जल जाता
टूटा तो हूँ मगर अभी बिखरा नहीं 'फ़राज़'मेरे बदन पे जैसे शिकस्तों का जाल हो
चराग़ों के बदले मकाँ जल रहे हैंनया है ज़माना नई रौशनी है
तुम्हारा सिर्फ़ हवाओं पे शक गया होगाचराग़ ख़ुद भी तो जल जल के थक गया होगा
गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैंहम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं
मिरे अश्क भी हैं इस में ये शराब उबल न जाएमिरा जाम छूने वाले तिरा हाथ जल न जाए
क्यूँ जल गया न ताब-ए-रुख़-ए-यार देख करजलता हूँ अपनी ताक़त-ए-दीदार देख कर
आशियाँ जल गया गुल्सिताँ लुट गया हम क़फ़स से निकल कर किधर जाएँगेइतने मानूस सय्याद से हो गए अब रिहाई मिलेगी तो मर जाएँगे
आज फिर बुझ गए जल जल के उमीदों के चराग़आज फिर तारों भरी रात ने दम तोड़ दिया
न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी हैदिया जल रहा है हवा चल रही है
रफ़ीक़ों से रक़ीब अच्छे जो जल कर नाम लेते हैंगुलों से ख़ार बेहतर हैं जो दामन थाम लेते हैं
चूल्हे नहीं जलाए कि बस्ती ही जल गईकुछ रोज़ हो गए हैं अब उठता नहीं धुआँ
ये लोग होमो-हवन में यक़ीन रखते हैंचलो यहाँ से चलें हाथ जल न जाए कहीं
वो ग़म अता किया दिल-ए-दीवाना जल गयाऐसी भी क्या शराब कि पैमाना जल गया
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