aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ".dts"
हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमीजिस को भी देखना हो कई बार देखना
घर में दस हों तो ये रौनक़ नहीं होगी घर मेंएक दीवाने से आबाद है सहरा कैसा
शराब बंद हो साक़ी के बस की बात नहींतमाम शहर है दो चार दस की बात नहीं
दस बजे रात को सो जाते हैं ख़बरें सुन करआँख खुलती है तो अख़बार तलब करते हैं
दिल का सुकून रिज़्क़ के हंगामे खा गएसुख आदमी का चंद निवालों ने डस लिया
जो चमन की हयात को डस लेउस कली को बबूल कहता हूँ
अगर देखे तुम्हारी ज़ुल्फ़ ले डसउलट जावे कलेजा नागनी का
घर के दुखड़े शहर के ग़म और देस बिदेस की चिंताएँइन में कुछ आवारा कुत्ते हैं कुछ हम ने पाले हैं
फिर जा रुकेगी बुझते ख़राबों के देस मेंसूनी सुलगती सोचती सुनसान सी सड़क
तुझ से बिछड़े गाँव छूटा शहर में आ कर बसेतज दिए सब संगी साथी त्याग डाला देस भी
पत्थरों के देस में शीशे का है अपना वक़ारदेवता अपनी जगह और आदमी अपनी जगह
दस बच्चों के अब्बा हैं मगर है यही ख़्वाहिशहर वक़्त ही बैठी रहे लैला मिरे आगे
मैं ने चाहा था कि साग़र तोड़ दूँख़ुद मिरी तौबा के टुकड़े हो गए
ये तेरा माल किसी रोज़ डस ही लेगा तुझेअगर तू इस में से ख़ैरात कुछ नहीं करेगा
लिक्खा है तारीख़ के सफ़हे सफ़हे पर येशाहों को भी दास बनाया जा सकता है
इक इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया उस गुल नेचौंके दस बीस रुके सैकड़ों खटके लाखों
गोरी सोवे सेज पर मुख पर डारे केसचल 'ख़ुसरो' घर आपने रैन भई चहूँ देस
हाकिम-ए-इश्क़ ने जब अक़्ल की तक़्सीर सुनीहो ग़ज़ब हुक्म दिया देस निकाला करने
भूले से आ गया हूँ फ़रिश्तों के देस मेंकिस से पता करूँ कि यहाँ फ़र्द कौन है
अब भी कुछ लोग मोहब्बत पे यक़ीं रखते हैंहो जो मुमकिन तो उन्हें देस निकाला दे दो
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