aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "bete"
हड्डियाँ बाप की गूदे से हुई हैं ख़ालीकम से कम अब तो ये बेटे भी कमाने लग जाएँ
हम भी तिरे बेटे हैं ज़रा देख हमें भीऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से शिकायत नहीं करते
ताक़ पर जुज़दान में लिपटी दुआएँ रह गईंचल दिए बेटे सफ़र पर घर में माएँ रह गईं
बेटे को चैक समझ लिया स्टेट-बैंक कासम्धी तलाश करने लगे हाई रैंक का
शहर में थी ना-साज़ तबीअत बेटे कीगाँव में बैठी माँ ने खाना छोड़ दिया
बेटे मसरूफ़ रहे माल के बटवारे मेंबेटियाँ बाप की मय्यत से लिपट कर रोईं
जुड़ा ही रहता है ममता की गर्भनाल से वोवजूद बेटे का माँ से जुदा नहीं होता
बेटे के मुँह पे दे के चपत बाप ने कहाफिर फ़ेल हो गया है मिनिस्टर बनेगा तू
दादा-गिरी में बाबा कुछ कम नहीं थे लेकिनबाबा से बढ़ के चालू बेटे निकल रहे हैं
बेटे में चाहे लाख ख़राबी हो 'मुख़्तसर'शादी के वक़्त बाइ'स-ए-इन्कम ज़रूर है
जिसे कहता है ज़माना बुत-ए-बे-महर-ओ-दग़ा-बाज़ जफ़ा-पेशा फ़ुसूँ-साज़ सितम-ख़ाना-बर-अन्दाज़ग़ज़ब जिस का हर इक नाज़ नज़र फ़ित्ना मिज़ा तीर बला ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर ग़म-ओ-रंज का बानी क़लक़-ओ-दर्द
बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगरमाँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है
कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँबीते हुए दिन रात न याद आएँ तो सोएँ
मैं तो बीते दिनों की खोज में हूँतू कहाँ तक चलेगा मेरे साथ
उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देतेहमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है
न समझा उम्र गुज़री उस बुत-ए-काफ़र को समझातेपिघल कर मोम हो जाता अगर पत्थर को समझाते
अब तो ज़रा सा गाँव भी बेटी न दे उसेलगता था वर्ना चीन का दामाद आगरा
बाप का है फ़ख़्र वो बेटा कि रखता हो कमालदेख आईने को फ़रज़ंद-ए-रशीद-ए-संग है
छोड़ूँगा मैं न उस बुत-ए-काफ़िर का पूजनाछोड़े न ख़ल्क़ गो मुझे काफ़र कहे बग़ैर
मुझे भी उस की जुदाई सताती रहती हैउसे भी ख़्वाब में बेटा दिखाई देता है
Jashn-e-Rekhta 10th Edition | 5-6-7 December Get Tickets Here
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books