aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "jhapaknaa"
भरे हैं रात के रेज़े कुछ ऐसे आँखों मेंउजाला हो तो हम आँखें झपकते रहते हैं
बता रहा है झटकना तिरी कलाई काज़रा भी रंज नहीं है तुझे जुदाई का
मैं झपटने के लिए ढूँढ रहा हूँ मौक़ाऔर वो शोख़ समझता है कि शरमाता हूँ
वक़्त बे-वक़्त झलकता है मिरी सूरत सेकौन चेहरा मिरी तश्कील में आया हुआ है
दिल से शौक़-ए-रुख़-ए-निकू न गयाझाँकना-ताकना कभू न गया
जब उस को देखते रहने से थकने लगता हूँतो अपने ख़्वाब की पलकें झपकने लगता हूँ
लम्बी सड़क पे दूर तलक कोई भी न थापलकें झपक रहा था दरीचा खुला हुआ
पलक झपकने में कुछ ख़्वाब टूट जाते हैंजो बुत-शिकन है वही लम्हा बुत-तराश भी था
आँखें फूटें जो झपकती भी होंशब-ए-तन्हाई में कैसा सोना
आता है ख़ौफ़ आँख झपकते हुए मुझेकोई फ़लक के ख़ेमे की रस्सी न काट दे
उस के अंदाज़ से झलकता था कोई किरदार दास्तानों काउस की आवाज़ से बिखरती थी कोई ख़ुशबू किसी कहानी की
अभी से इस में शबाहत मिरी झलकने लगीअभी तो दश्त में दो चार दिन गुज़ारे हैं
यूँ तो मुमकिन नहीं दुश्मन मिरे सर पर पहुँचेपहरे-दारों में कोई आँख झपक जाता है
कटती है शब विसाल की पलकें झपकते हीजिस की सुब्ह न हो कभी वो रात भी तो हो
तुझ आँख से झलकता था एहसास-ए-ज़िंदगीमैं देखता रहा हूँ तुझे ख़ाक-दान से
फ़ज़ा-ए-शहर बड़ी ख़ुश-गवार थी लेकिनपलक झपकते ही कैसा अजीब मंज़र था
यूँ तिरी चाप से तहरीक-ए-सफ़र टूटती हैजैसे पलकों के झपकने से नज़र टूटती है
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