aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "kaun"
इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ ख़ुदालड़ते हैं और हाथ में तलवार भी नहीं
कौन इस घर की देख-भाल करेरोज़ इक चीज़ टूट जाती है
कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्तसब को अपनी ही किसी बात पे रोना आया
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तककौन जीता है तिरी ज़ुल्फ़ के सर होते तक
पूछते हैं वो कि 'ग़ालिब' कौन हैकोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
कौन सी बात है तुम में ऐसीइतने अच्छे क्यूँ लगते हो
तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहलेतिरा हुस्न कुछ नहीं था मिरी शाइरी से पहले
कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगामैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा
कुछ ख़बर है तुझे ओ चैन से सोने वालेरात भर कौन तिरी याद में बेदार रहा
गँवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैं नेवो कौन है जिसे देखा नहीं कभी मैं ने
कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगामेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा
दुश्मनों के साथ मेरे दोस्त भी आज़ाद हैंदेखना है खींचता है मुझ पे पहला तीर कौन
लोग कहते हैं मोहब्बत में असर होता हैकौन से शहर में होता है किधर होता है
अगर तलाश करूँ कोई मिल ही जाएगामगर तुम्हारी तरह कौन मुझ को चाहेगा
वो कौन था जो दिन के उजाले में खो गयाये चाँद किस को ढूँडने निकला है शाम से
आप का ए'तिबार कौन करेरोज़ का इंतिज़ार कौन करे
कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहींशौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
मैं रोज़ इधर से गुज़रता हूँ कौन देखता हैमैं जब इधर से न गुज़रूँगा कौन देखेगा
जिस को तुम भूल गए याद करे कौन उस कोजिस को तुम याद हो वो और किसे याद करे
किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भीये हुस्न ओ इश्क़ तो धोका है सब मगर फिर भी
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