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शेर
आ गया ध्यान में मज़मूँ तिरी यकताई का
आज मतला हुआ मिस्रा मिरी तन्हाई का
सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम
शेर
मअ'नी-ए-रौशन जो हों तो सौ से बेहतर एक शेर
मतला-ए-ख़ुर्शीद काफ़ी है पए-दीवान-ए-सुब्ह
पंडित दया शंकर नसीम लखनवी
शेर
क्या इसी ने ये किया मतला-ए-अबरू मौज़ूँ
तुम जो कहते हो सुख़न-गो है बड़ी मेरी आँख
ख़्वाज़ा मोहम्मद वज़ीर
शेर
नाम से तेरे जो रौशन मतला-ए-दीवाँ हुआ
हर वरक़ ख़ुर्शीद का मानिंद-ए-नूर अफ़्शाँ हुआ
राजा जिया लाल बहादुर गुलशन
शेर
मज़ा मतला का दे फ़िक्र-ए-दो-पहलू हो तो ऐसी हो
रहें हिस्से बराबर बैत-ए-अबरू हो तो ऐसी हो
नसीम देहलवी
शेर
औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा धुत्कार दिया
साहिर लुधियानवी
शेर
न पाने से किसी के है न कुछ खोने से मतलब है
ये दुनिया है इसे तो कुछ न कुछ होने से मतलब है
वसीम बरेलवी
शेर
हम तो रात का मतलब समझें ख़्वाब, सितारे, चाँद, चराग़
आगे का अहवाल वो जाने जिस ने रात गुज़ारी हो
इरफ़ान सिद्दीक़ी
शेर
इब्न-ए-इंशा
शेर
जब तक माथा चूम के रुख़्सत करने वाली ज़िंदा थी
दरवाज़े के बाहर तक भी मुँह में लुक़्मा होता था