aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "sunaataa"
मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूँवो ग़ज़ल आप को सुनाता हूँ
मिरे ख़िलाफ़ सभी साज़िशें रचीं जिस नेवो रो रहा है मिरी दास्ताँ सुनाता हुआ
सुनाता है क्या हैरत-अंगेज़ क़िस्सेहसीनों में खोई हो जिस ने जवानी
सुख़न-वरी का बहाना बनाता रहता हूँतिरा फ़साना तुझी को सुनाता रहता हूँ
मेरी रुस्वाई में वो भी हैं बराबर के शरीकमेरे क़िस्से मिरे यारों को सुनाता क्या है
शाम होती है तो मेरा ही फ़साना अक्सरवो जो टूटा हुआ तारा है सुनाता है मुझे
ज़बान-ए-दिल से कोई शाइ'री सुनाता हैतो सामईन भुलाते नहीं कलाम उस का
शब-ए-जमाल सलामत रहें तिरे परी-ज़ादजिन्हें मैं ख़्वाब सुनाता हूँ रक़्स करता हूँ
वो शहर भर को फ़साने सुनाता फिरता हैहमारे सामने सच्चा बने तो बात बने
पुराने अह्द के क़िस्से सुनाता रहता हैबचा हुआ है जो बूढ़ा शजर हमारी तरफ़
मैं सुनाता रहा दुखड़े 'ख़ावर'और रोती रही शब भर दीवार
वो जौन की ग़ज़लें भी सुनाता था मुझे परमैं उस की उदासी को समझती ही नहीं थी
मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहासब अपने अपने चाहने वालों में खो गए
ग़ैरों से कहा तुम ने ग़ैरों से सुना तुम नेकुछ हम से कहा होता कुछ हम से सुना होता
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगेमैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ कोमैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं
सुना है उस के बदन की तराश ऐसी हैकि फूल अपनी क़बाएँ कतर के देखते हैं
कब वो सुनता है कहानी मेरीऔर फिर वो भी ज़बानी मेरी
हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाएकभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए
डर हम को भी लगता है रस्ते के सन्नाटे सेलेकिन एक सफ़र पर ऐ दिल अब जाना तो होगा
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