aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "unko"
तलब करें तो ये आँखें भी इन को दे दूँ मैंमगर ये लोग इन आँखों के ख़्वाब माँगते हैं
इन को क्या काम है मुरव्वत से अपनी रुख़ से ये मुँह न मोड़ेंगेजान शायद फ़रिश्ते छोड़ भी दें डॉक्टर फ़ीस को न छोड़ेंगे
जाने क्या सोच के फिर इन को रिहाई दे दीहम ने अब के भी परिंदों को तह-ए-दाम किया
आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगावक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
रगों में दौड़ते फिरने के हम नहीं क़ाइलजब आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है
नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आतीमगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं
उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआअब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
शाम से आँख में नमी सी हैआज फिर आप की कमी सी है
कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
उन का ज़िक्र उन की तमन्ना उन की यादवक़्त कितना क़ीमती है आज कल
हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ीख़ुदा करे कि जवानी तिरी रहे बे-दाग़
अब तो उन की याद भी आती नहींकितनी तन्हा हो गईं तन्हाइयाँ
इक अजब हाल है कि अब उस कोयाद करना भी बेवफ़ाई है
आँख से दूर सही दिल से कहाँ जाएगाजाने वाले तू हमें याद बहुत आएगा
उस को रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न थासारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिनज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम नेइस बहाने से मगर देख ली दुनिया हम ने
किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप कोकाग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखोज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो
ढूँडता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप कोआप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं
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