aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम ",Bud"
आमद पे तेरी इत्र ओ चराग़ ओ सुबू न होंइतना भी बूद-ओ-बाश को सादा नहीं किया
गुलज़ार-ए-हस्त-ओ-बूद न बेगाना-वार देखहै देखने की चीज़ इसे बार बार देख
बूद-ओ-नबूद की तमीज़ एक अज़ाब थी कि थीया'नी तमाम ज़िंदगी धुँद में डूबती गई
एक दम थी नुमूद बूद अपनीया सफ़ेदी की या अख़ीर हुए
जो थी दिल-ताएरों की मोहलत-ए-बूदता ज़मीं वो उड़ान में गुज़री
जूँ शरर ऐ हस्ती-ए-बे-बूद याँबारे हम भी अपनी बारी भर चले
जाने हम किस की बूद का थे सुबूतजाने किस की निशानियाँ थे हम
बूद पल पल की बे-हिसाबी हैकि मुहासिब नहीं हिसाब नहीं
क्या कहें तुम से बूद-ओ-बाश अपनीकाम ही क्या वही तलाश अपनी
बूद-ओ-नबूद का हिसाब मैं नहीं जानता मगरसारे वजूद की नहीं मेरे अदम की हाँ में है
है जो बूद-ओ-नबूद का दफ़्तरआख़िरश ये कहाँ का दफ़्तर है
बस इक गुबार-ए-वहम है इक कूचा-गर्द कादीवार-ए-बूद कुछ नहीं और दर भी कुछ नहीं
दिल ने पढ़ा सबक़ तमाम बूद तो है क़लक़ तमामहाँ मिरा नाम रंज है हाँ तिरा नाम रंज है
लेता हूँ मकतब-ए-ग़म-ए-दिल में सबक़ हनूज़लेकिन यही कि रफ़्त गया और बूद था
ज़िंदा लोगों की बूद-ओ-बाश में हैंमुर्दा लोगों की आदतें बाक़ी
इश्क़ उन की अक़्ल को है जो मा-सिवा हमारेनाचीज़ जानते हैं ना-बूद जानते हैं
सहरा की बूद-ओ-बाश है अच्छी न क्यूँ लगेसूखी हुई गुलाब की टहनी गिलास में
हाँ मेरे मजरूह तबस्सुम ख़ुश्क लबों तक आता जाफूल की हस्त-ओ-बूद यही है खिलता जा मुरझाता जा
ख़ूब था पहले से होते जो हम अपने बद-ख़्वाहकि भला चाहते हैं और बुरा होता है
मिरे साथ बूद-ओ-नबूद में जो धड़क रहा है वजूद मेंइसी दिल ने एक जहान का मुझे रू-शनास तो कर दिया
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