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ग़ज़ल
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
दिन में हम को देखने वालो अपने अपने हैं औक़ात
जाओ न तुम इन ख़ुश्क आँखों पर हम रातों को रो लें हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़ज़ल
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
हसन रिज़वी
ग़ज़ल
न इत्मिनान से बैठो न गहरी नींद सो पाओ
मियाँ इस मुख़्तसर सी ज़िंदगी से चाहते क्या हो