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ग़ज़ल
तिरे मनचलों का जग में ये अजब चलन रहा है
न किसी की बात सुनना, न किसी से बात करना
पीर सय्यद नसीरुद्दीन नसीर गीलानी
ग़ज़ल
जावेद अख़्तर
ग़ज़ल
जाने क्या क्या बोल रहा था सरहद प्यार किताबें ख़ून
कल मेरी नींदों में छुप कर जाग रहा था जाने कौन