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ग़ज़ल
शामिल हैं सदा स'य-ए-‘अमल में सफ़ा मर्वा
का'बे की ज़मीं अस्ल में फ़िरदौस-ए-बरीं है
इरतिज़ा निशात
ग़ज़ल
स'ई-ए-ज़ब्त-ए-ग़म के तुम हो इक निशान-ए-मो'तबर
सिर्फ़ इतनी बात पर चेहरे की वीरानी गई
उरूज ज़ैदी बदायूनी
ग़ज़ल
हर नफ़स ख़ामा तो है सा’य-ए-रक़म में मसरूफ़
सर को आशुफ़्ता न रखती है मिरी वहशत ही
सय्यद निसार अहमद निसार
ग़ज़ल
मेरा साँस उखड़ते ही सब बैन करेंगे रोएँगे
या'नी मेरे बा'द भी या'नी साँस लिए जाते होंगे
जौन एलिया
ग़ज़ल
कभी तो सुब्ह तिरे कुंज-ए-लब से हो आग़ाज़
कभी तो शब सर-ए-काकुल से मुश्क-बार चले