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ग़ज़ल
उमैर नजमी
ग़ज़ल
जो बारिशों से क़ब्ल अपना रिज़्क़ घर में भर चुका
वो शहर-ए-मोर से न था प दूरबीं बला का था
परवीन शाकिर
ग़ज़ल
तिरे दुख में हमारे बाल चाँदी हो गए हैं
और इस चाँदी ने क़ब्ल अज़ वक़्त बूढ़ा कर दिया है
हसन अब्बास रज़ा
ग़ज़ल
क़ब्ल इस के मुझे झुलसा दे ग़मों का सूरज
मुझ पे तू अपनी सियह ज़ुल्फ़ों का बादल कर दे
फ़रहत नदीम हुमायूँ
ग़ज़ल
आरज़ू लखनवी
ग़ज़ल
मैं चला जाऊँ न गुलशन छोड़ कर क़ब्ल-अज़-बहार
क्यूँ गिरीं सारे चमन पर बिजलियाँ मेरे लिए
बिस्मिल सईदी
ग़ज़ल
ग़रज़ शायद ये है 'रंजूर' क़ब्ल-अज़-मौत मर जाए
चले हो तुम जो यूँ बहर-ए-'अयादत आज बन-ठन के