aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "तितली"
गुल से लिपटी हुई तितली को गिरा कर देखोआँधियो तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा
बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैंकिसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए
काँटों में घिरे फूल को चूम आएगी लेकिनतितली के परों को कभी छिलते नहीं देखा
कोई तितली निशाने पर नहीं हैमैं बस रंगों का पीछा कर रहा हूँ
तितली चमन में फूल से लिपटी रहती हैफिर भी चमन में फूल कँवारा लगता है
तितली के तआक़ुब में कोई फूल सा बच्चाऐसा ही कोई ख़्वाब हमारा भी कभी था
तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ हैमेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
तितली के जैसी है मेरी हर ख़्वाहिशहाथ लगाने से पहले उड़ जाती है
कली को छोड़ के नक़्श-ए-क़दम पे बैठ गईक़लम हिलाए बिना तितली ने ग़ज़ल कह दी
अब वो तितली है न वो उम्र तआ'क़ुब वालीमैं न कहता था बहुत दूर न जाना मरे दोस्त
अभी सादा वरक़ पर नाम तेरा लिख के बैठा हूँअभी इस में महक आनी है तितली ने उतरना है
मुझे यूँ लगा कि ख़मोश ख़ुशबू के होंट तितली ने छू लिएउन्हीं ज़र्द पत्तों की ओट में कोई फूल सोया हुआ न हो
ख़्वाब का राज़ फ़क़त रात के सीने में हैदिन में ता'बीर की तितली को पकड़ना छोड़ो
कल तेरी तस्वीर मुकम्मल की मैं नेफ़ौरन उस पर तितली आ कर बैठ गई
मैं बस्ती में तितली पकड़ा करता थाबाक़ी सारे लोग तो झगड़ा करते थे
आज बचपन कहीं बस्तों में ही उलझा है 'सहाब'फिर वो तितली को पकड़ना वो उड़ाना आए
'शाहिद' दारोग़-गोई-ए-गुलज़ार पर न जातितली से पूछ रंग-फ़िशानी फ़रेब है
बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दीआज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा
मैं ने माँ का लिबास जब पहनामुझ को तितली ने अपने रंग दिए
मैं ने कुछ रंग चुराए थे किसी तितली केऔर फिर उम्र हिफ़ाज़त में बितानी पड़ी थी
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