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ग़ज़ल
ज़ौ-फ़िशाँ सीने में सोज़-ए-ग़म-ए-पिन्हाँ निकला
दिल का हर दाग़ चराग़-ए-तह-ए-दामाँ निकला
अफ़क़र मोहानी
ग़ज़ल
दिल को नसीब सोज़-ए-ग़म-ए-गुलसिताँ कहाँ
होता तो आज होता ये दर्द-ए-निहाँ कहाँ
शांति लाल मल्होत्रा
ग़ज़ल
सोज़-ए-ग़म-ए-फ़िराक़ जलाए तो क्या करूँ
दर-पर्दा कोई आग लगाए तो क्या करूँ
राजा अब्दुल ग़फ़ूर जौहर निज़ामी
ग़ज़ल
मुग़ीसुद्दीन फ़रीदी
ग़ज़ल
सोज़-ए-ग़म अहल-ए-मोहब्बत को ख़ुदा बख़्शे है
ये वो मरहम है जो ज़ख़्मों को शिफ़ा बख़्शे है
शादाँ बदायूनी
ग़ज़ल
सोज़-ए-ग़म रंज-ओ-अलम हद से सिवा देते हैं
वो भी क्या ख़ूब मोहब्बत का सिला देते हैं