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ग़ज़ल
बाज़ार-ए-अज़ल यूँ तो बहुत गर्म था लेकिन
ले दे के मोहब्बत के ख़रीदार हमीं थे
एहसान दानिश कांधलवी
ग़ज़ल
इब्न-ए-इंशा
ग़ज़ल
ज़िंदगी के नर्म काँधों पर लिए फिरते हैं हम
ग़म का जो बार-ए-गिराँ इनआम ले कर आए हैं
सय्यदा शान-ए-मेराज
ग़ज़ल
इस ‘अक़ीदे ने लिया क़ैसर-ओ-किसरा से ख़िराज
मौत का वक़्त अज़ल से है मुक़र्रर देखो
बद्र-ए-आलम ख़ाँ आज़मी
ग़ज़ल
'क़ुदसी' तो अकेला नहीं मैदान-ए-सुख़न में
हर कूचा-ओ-बाज़ार में फ़न-कार बहुत हैं
औलाद-ए-रसूल क़ुद्सी
ग़ज़ल
हम-नशीं पूछ न हाल-ए-दिल-ए-नाकाम-ए-अज़ल
यही हसरत रही पूरा कोई अरमाँ न हुआ