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ग़ज़ल
जहाँ दो दिल मिले दुनिया ने काँटे बो दिए अक्सर
यही अपनी कहानी है न तुम समझे न हम समझे
सबा अकबराबादी
ग़ज़ल
दहक़ाँ की तरह दाना ज़मीन में न बो अबस
बौना वही जो तुख़्म-ए-अमल दिल में बोइए
शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
ग़ज़ल
बहारों से नहीं जिन को तवक़्क़ो लाला-ओ-गुल की
वो अपने वास्ते काँटे ही बो लेते तो अच्छा था
रईस अमरोहवी
ग़ज़ल
तूर पर राह-ए-वफ़ा में बो दिए काँटे कलीम
इश्क़ की वुसअत को मस्दूद-ए-तक़ाज़ा कर दिया
एहसान दानिश कांधलवी
ग़ज़ल
मुदाम दिल में रहे दाग़-ए-उल्फ़त-ए-साक़ी
न बे-चराग़ हो यारब शराब-ख़ाना-ए-इश्क़