aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chamakne"
ढूँढे है तो पलकों पे चमकने के बहानेआँसू को मिरी आँख में आना नहीं आता
वो सितारा है चमकने दो यूँही आँखों मेंक्या ज़रूरी है उसे जिस्म बना कर देखो
चमकने वाली है तहरीर मेरी क़िस्मत कीकोई चराग़ की लौ को ज़रा सा कम कर दे
हमारे हुस्न की बिजली चमकने वाली हैन जाने आज हज़ारों का हाल क्या होगा
क़त्ल-गह में ये चराग़ाँ है मिरे दम से 'बशीर'मुझ को देखा तो चमकने लगे ख़ंजर सारे
हम इस डर से कोई सूरज चमकने ही नहीं देतेकि जाने शब के अँधियारों से क्या मंज़र निकलना है
बिजली के चमकने में कहाँ इश्क़ की गर्मीवो शोला-ए-लर्ज़ाँ-ओ-तपाँ और ही कुछ है
सूरज हूँ चमकने का भी हक़ चाहिए मुझ कोमैं कोहर में लिपटा हूँ शफ़क़ चाहिए मुझ को
जिसे भी प्यास बुझानी हो मेरे पास रहेकभी भी अपने लबों से छलकने लगता हूँ
जब दर्द-ए-दिल बढ़ा तो उन्हें रहम आ गयापैदा हुई चमक तो चमकने लगा नसीब
अपना रंग-ए-ग़ज़ल उस के रुख़्सार सादिल चमकने लगा है रुख़-ए-यार सा
जुगनू हैं तीरगी में चमकते रहे हैं हमसूरज की रौशनी में चमकने नहीं गए
अभी उस ने आने का वा'दा किया हैचमकने लगे बाम-ओ-दर रफ़्ता रफ़्ता
तुम आ गए तो चमकने लगी हैं दीवारेंअभी अभी तो यहाँ पर बड़ा अँधेरा था
तिरे बदन में चिंगारी सी क्या शय है'अक्स ज़रा सा और चमकने वाला मैं
कहीं सूरज कहीं ज़र्रा चमकता हैइशारे से तिरे क्या क्या चमकता है
फिर वो दरिया है किनारों से छलकने वालाशहर में कोई नहीं आँख झपकने वाला
चमकने की ख़ातिर है बेताब हर शयकोई रौशनी इन अँधेरों पे डाले
मैं सिर्फ़ तीरा-शबी पर यक़ीं नहीं रखताअभी ज़मीं पे चमकने को आफ़्ताब तो है
चमकने दो सितारों को फ़लक परअभी तो 'शम्स' की बारी नहीं है
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