आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "dar-e-yaar"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "dar-e-yaar"
ग़ज़ल
इस क़दर ज़ोफ़ में आवाज़ निकलती तो कहाँ
हम से ज़ंजीर-ए-दर-ए-यार हिलाई न गई
ज़ैनुल आब्दीन ख़ाँ आरिफ़
ग़ज़ल
होना है जो हस्ती को मिरी ख़ाक ही 'सीमाब'
पहले ही से क्यूँ ख़ाक-ए-दर-ए-यार न हो जाए
सीमाब अकबराबादी
ग़ज़ल
ज़ंजीर-ए-दर-ए-यार पे रहती हैं निगाहें
फज्र-ओ-ज़ुहर-ओ-अस्र या तारीकी-ए-शब हो