आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "dinner"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "dinner"
ग़ज़ल
अकबर इलाहाबादी
ग़ज़ल
उड़ाएँगे डिनर में सारे लीडर मुर्ग़ियाँ कब तक
रेआया कुंडियों में ढूँढ खाए हड्डियाँ कब तक
रऊफ़ रहीम
ग़ज़ल
सैंकड़ों तरह की चीज़ें थीं डिनर में लेकिन
ये तो फ़रमाएँ वहाँ क़ीमा-ए-ख़िंज़ीर भी था
हाशिम अज़ीमाबादी
ग़ज़ल
राह-ओ-रस्म से बॉस पिघलता लंच-ओ-डिनर से आप का होता
ख़ुद जाते या उसे बुलाते मिलते-जुलते आते जाते
नज़र बर्नी
ग़ज़ल
मंदिरों में संख बाजे मस्जिदों में हो अज़ाँ
शैख़ का धर्म और दीन-ए-बरहमन आज़ाद है
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
पुरनम इलाहाबादी
ग़ज़ल
'फ़ैज़' जब चाहा जो कुछ चाहा सदा माँग लिया
हाथ फैला के दिल-ए-बे-ज़र-ओ-दीनार से हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ग़ज़ल
आज से मुझ पर मुकम्मल हो गया दीन-ए-फ़िराक़
हाँ तसव्वुर में भी अब तुझ से जुदा रहता हूँ मैं
अहमद मुश्ताक़
ग़ज़ल
आस्तान-ए-यार पर हर वक़्त सज्दे कीजिए
है यही बस दीन-ए-इश्क़ ईमान-ए-इश्क़ इस्लाम-ए-इश्क़
अबुल कलाम आज़ाद
ग़ज़ल
मुसल्लम थी सख़ावत जिस की दुनिया भर में उस ने
मुझे तनख़्वाह-ए-बे-दीनार पर रक्खा हुआ था
जमाल एहसानी
ग़ज़ल
तीन जगह से मेरे गले को मिस्ल-ए-शुतुर ये काटते हैं
दीन-ए-मोहम्मदी है जो ख़लीली उस की ये तुग़्यानी है