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ग़ज़ल
कहने को शम-ए-बज़्म-ए-ज़मान-ओ-मकाँ हूँ मैं
सोचो तो सिर्फ़ कुश्ता-ए-दौर-ए-जहाँ हूँ मैं
अमीक़ हनफ़ी
ग़ज़ल
सुरूर-ओ-कैफ़ से पुर है ग़म-ए-दौर-ए-जहाँ साक़ी
नज़र के सामने रक़्साँ है तास-ए-आसमाँ साक़ी
मसरूर शफ़क़ी
ग़ज़ल
वो दिल जो कुश्ता-ए-ग़म-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ न था
शाइस्ता-ए-नवाज़िश-ए-दौर-ए-जहाँ न था
अब्दुल अज़ीज़ फ़ितरत
ग़ज़ल
पन्ना लाल नूर
ग़ज़ल
क्या वज्ह तेरे ज़ुल्म-ओ-सितम में मज़ा नहीं
ऐ दौर-ए-चर्ख़ आज वो शायद नहीं शरीक
परवीन उम्म-ए-मुश्ताक़
ग़ज़ल
मख़मूर सईदी
ग़ज़ल
हम से मिल के फ़ितरत के पेच-ओ-ख़म को समझोगे
हम जहान-ए-फ़ितरत का इक सुराग़ हैं यारो