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ग़ज़ल
सिराज औरंगाबादी
ग़ज़ल
सुना है बे-नियाज़ी ही इलाज-ए-ना-उमीदी है
ये नुस्ख़ा भी कोई दिन आज़मा कर देख लेता हूँ
अहमद मुश्ताक़
ग़ज़ल
नुस्ख़ा-ए-हस्ती में इबरत के सिवा क्या था 'हफ़ीज़'
सुर्ख़ियाँ कुछ मिल गईं अपने फ़साने के लिए
हफ़ीज़ जालंधरी
ग़ज़ल
किया यक-सर गुदाज़-ए-दिल नियाज़-ए-जोशिश-ए-हसरत
सुवैदा नुस्ख़ा-ए-तह-बंदी-ए-दाग़-ए-तमन्ना है
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
शायद था बयाज़-ए-शब में कहीं इक्सीर का नुस्ख़ा भी कोई
ऐ सुब्ह ये तेरी झोली है या दुनिया भर का सोना है
हामिदुल्लाह अफ़सर
ग़ज़ल
न पाया दर्दमंद-ए-दूरी-ए-यारान-ए-यक-दिल ने
सवाद-ए-ख़त्त-ए-पेशानी से नुस्ख़ा मोम्याई का
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
बजाए दाना ख़िर्मन यक-बयाबाँ बैज़ा-ए-कुमरी
मिरा हासिल वो नुस्ख़ा है कि जिस से ख़ाक पैदा हो
मिर्ज़ा ग़ालिब
ग़ज़ल
अगरचे ख़ाकसारी कीमिया का सहल नुस्ख़ा है
व-लेकिन हाथ आया जिस के दुश्वारी से हाथ आया
बहादुर शाह ज़फ़र
ग़ज़ल
दिल मारने का नुस्ख़ा पहुँचा है आशिक़ों तक
क्या कोई जानता है इस कीमिया-गरी को
ख़ान आरज़ू सिराजुद्दीन अली
ग़ज़ल
जिस ने सीखी हैं हमीं से शेर की बारीकियाँ
अब ग़ज़ल कहने का नुस्ख़ा वो बताता है हमें