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ग़ज़ल
बढ़ गई मय पीने से दिल की तमन्ना और भी
सदक़ा अपना साक़िया यक जाम-ए-सहबा और भी
मुंशी अमीरुल्लाह तस्लीम
ग़ज़ल
अल्लामा इक़बाल
ग़ज़ल
सबा अफ़ग़ानी
ग़ज़ल
फ़ना बुलंदशहरी
ग़ज़ल
अज्ञात
ग़ज़ल
ज़ुबैर अली ताबिश
ग़ज़ल
हाज़िर हैं कलीसा में कबाब ओ मय-ए-गुलगूँ
मस्जिद में धरा क्या है ब-जुज़ मौइज़ा ओ पंद