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ग़ज़ल
दिल की बातें नहीं है तो दिलचस्प ही कुछ बातें हों
ज़िंदा रहना है तो दिल को बहलाना तो होगा
जावेद अख़्तर
ग़ज़ल
अगर तुम दिल हमारा ले के पछताए तो रहने दो
न काम आए तो वापस दो जो काम आए तो रहने दो
मुज़्तर ख़ैराबादी
ग़ज़ल
ख़िलाफ़-ए-मा'मूल मूड अच्छा है आज मेरा मैं कह रही हूँ
कि फिर कभी मुझ से करते रहना ये भाव-ताव मुझे मनाओ
आमिर अमीर
ग़ज़ल
नफ़रतों के जहान में हम को प्यार की बस्तियाँ बसानी हैं
दूर रहना कोई कमाल नहीं पास आओ तो कोई बात बने
साहिर लुधियानवी
ग़ज़ल
'जलील' उस की तलब से बाज़ रहना सख़्त ग़फ़लत है
ग़नीमत जानिए उस को कि वो मुश्किल से मिलता है
जलील मानिकपूरी
ग़ज़ल
गर हक़ीक़त में है रहना तो न रख ख़ुद-बीनी
भूले बंदा जो ख़ुदी को तो ख़ुदा याद रहे