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ग़ज़ल
इसी में कुछ सुकून है शु'ऊर-ए-ग़म का साथ दें
यही ख़ुशी की बात है चले चलें ख़ुशी ख़ुशी
शहाब सर्मदी
ग़ज़ल
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी