आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "saar-baa.n"
ग़ज़ल के संबंधित परिणाम "saar-baa.n"
ग़ज़ल
पड़ा हूँ ज़ेर-ए-क़दम ख़ाक-ए-रहगुज़र बन कर
झुका हूँ मैं हमा-तन उस गली में सर बन कर
मज़ाक़ बदायूनी
ग़ज़ल
ज़ुल्फ़-ए-कज-रफ़्तार की कब चाल चल सकता है वो
ऐसी ठोकर खाए सर बन जाए रोड़ा साँप का
इमदाद अली बहर
ग़ज़ल
खिड़कियाँ सब बंद कमरों और दालानों के बीच
बट गए परिवार आख़िर सैंकड़ों ख़ानों के बीच
मोनी गोपाल तपिश
ग़ज़ल
खिड़कियाँ सब बंद कमरों और दालानों के बीच
बट गए परिवार आख़िर सैंकड़ों ख़ानों के बीच
मोनी गोपाल तपिश
ग़ज़ल
कहा था सार-बाँ के कान में लैला ने आहिस्ता
कि मजनूँ की ख़राबी का कहीं मज़कूर मत कीजो